आज की तिथि और वार
18 जनवरी 2026 रविवार को हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से विशेष रूप से मनाया जाता है। इस पवित्र तिथि का आरंभ 18 जनवरी की मध्य रात्रि 12:03 बजे से होता है और यह 19 जनवरी की सुबह 1:21 बजे तक जारी रहती है। अमावस्या तिथि के कारण आज चंद्रमा दिखाई नहीं देगा, जो नव चंद्र चरण का प्रतीक है।

नक्षत्र, योग और करण विवरण

नक्षत्र, योग और करण विवरण
आज का दिन पंचांग के अनुसार प्रमुख रूप से पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह तक रहेगा, इसके बाद उत्तराषाढा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। योग के रूप में आज हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की संभावना है, जो धार्मिक कार्यों और स्नान-दान के लिए शुभ माने जाते हैं। करण की बात करें तो दिन में चतुष्पाद करण रहेगा और उसके बाद नाग करण रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
18 जनवरी को सूर्योदय सुबह 7:15 बजे और सूर्यास्त शाम 5:38 बजे होगा। चंद्रमा आज अमावस्या की स्थिति में है, इसलिए चंद्रोदय नहीं होगा और चंद्रास्त लगभग दोपहर 5:20 बजे माना गया है। दिन की लंबाई लगभग 10 घंटे 34 मिनट और रात्रि लगभग 13 घंटे 25 मिनट रहेगी।
शुभ मुहूर्त और पंचांग आधारित क्रियाएँ
मौनी अमावस्या पर धार्मिक क्रियाओं और व्रतों का विशेष महत्व है। सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग के दौरान पूजा, ध्यान और धर्म-कर्म का लाभ अधिक होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान करने से पितृ शांति तथा आत्मशुद्धि में सहायता मिलती है।
राहुकाल और अन्य काल
आज के पंचांग के अनुसार राहुकाल का समय संध्याकाल के लगभग 4:30 बजे से 6:00 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों से बचना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा चौघड़िया जैसे कालों के अनुसार सुबह और शाम के विभिन्न समयों में शुभ-अशुभ प्रभाव मानकर कार्य योजनाएं बनाई जा सकती हैं।
मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
मौनी अमावस्या को मौन व्रत का नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस दिन कई लोग मौन जागरण, ध्यान, पूजा-पाठ, दान-दक्षिणा और गंगा स्नान जैसी धार्मिक गतिविधियां करते हैं। शास्त्रों में यह दिन पितृ तर्पण, पितृ शांति और आत्मिक शुद्धता के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। आध्यात्मिक अनुशासन और मानसिक संतुलन के लिए मौन का पालन एक महत्वपूर्ण अभ्यास माना जाता है।यह पंचांग आधारित जानकारी ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी विशेष धार्मिक क्रिया, व्रत या मुहूर्त हेतु व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार विशेषज्ञ सलाह लेना आवश्यक है।

