By: Vikash Kumar (Vicky)
देश के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल केदारनाथ धाम को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अब केदारनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालु रील, वीडियो या फोटो शूट नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का मकसद धार्मिक मर्यादा बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ मंदिर में सोशल मीडिया के लिए रील और वीडियो बनाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई बार भक्त मंदिर परिसर में अनुचित हरकतें करते पाए गए, जिससे मंदिर की गरिमा और पवित्रता पर सवाल खड़े हुए। इसी को देखते हुए प्रशासन ने अब सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
उत्तराखंड सरकार और मंदिर समिति के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचते हैं। हाल के वर्षों में देखा गया है कि कुछ लोग दर्शन के बजाय सोशल मीडिया कंटेंट बनाने को प्राथमिकता देने लगे हैं। इससे न केवल भीड़ बढ़ती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार लोग मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के कारण लाइन तोड़ते हैं, वीडियो शूट करने के लिए रुक जाते हैं और दूसरों की आस्था में बाधा बनते हैं। इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्र में नेटवर्क और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से तकनीकी और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ते हैं।
मोबाइल बैन का क्या होगा दायरा?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार:
• केदारनाथ मंदिर परिसर में मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकता है
• श्रद्धालुओं को दर्शन से पहले मोबाइल जमा करना अनिवार्य किया जा सकता है
• केवल आपातकालीन सेवाओं, सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को मोबाइल रखने की अनुमति होगी
• नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना या दर्शन से वंचित करने जैसी कार्रवाई हो सकती है
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले नियम लागू किए जाने की पूरी संभावना है।
चारधाम यात्रा में पहले से ही सख्त नियम
चारधाम यात्रा के दौरान पहले से ही कई नियम लागू हैं, जिनमें रजिस्ट्रेशन, स्वास्थ्य जांच और सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को अनुमति देना शामिल है। अब मोबाइल बैन और रील प्रतिबंध को भी इन्हीं नियमों की कड़ी माना जा रहा है।
मंदिर समिति का कहना है कि यह फैसला किसी की स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया है।

संत समाज और तीर्थ पुरोहितों का समर्थन
इस फैसले को संत समाज और तीर्थ पुरोहितों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि केदारनाथ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां मनोरंजन या सोशल मीडिया प्रचार की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
पुरोहितों के अनुसार, मंदिर परिसर में मोबाइल और कैमरे पर रोक लगने से श्रद्धालु मन से पूजा-पाठ और ध्यान कर पाएंगे।
श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस फैसले पर श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि जीवनभर की यादों के लिए फोटो लेना जरूरी होता है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि मंदिर परिसर के बाहर निर्धारित स्थानों पर फोटो लेने की अनुमति दी जा सकती है।
कब से लागू होंगे नए नियम?
सूत्रों के मुताबिक, यह नियम आगामी चारधाम यात्रा सत्र से लागू किए जा सकते हैं। यात्रा शुरू होने से पहले प्रशासन की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और केदारनाथ धाम की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने में सहयोग करें।

