By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर जिले में न्यायालय से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में विधि शाखा से संबंधित विभिन्न विभागों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा ने की। इस बैठक में उच्च एवं उच्चतम न्यायालयों में लंबित मामलों की अद्यतन स्थिति की विभागवार समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को कई आवश्यक एवं ठोस दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जिनमें अब तक शपथ पत्र दाखिल नहीं किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों में संबंधित अधिकारी समयबद्ध तरीके से प्रति शपथ पत्र दायर करें ताकि न्यायालयों में मामलों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही या प्रक्रियागत शिथिलता के कारण किसी भी मामले में देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
उपायुक्त ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन न केवल न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करता है बल्कि प्रशासन की छवि को भी सुदृढ़ करता है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे प्रत्येक वाद की नियमित मॉनिटरिंग करें तथा आवश्यकता पड़ने पर विधिक परामर्श प्राप्त कर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

एम्स देवघर से जुड़े बुनियादी ढांचे की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान एम्स देवघर में नागरिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने से संबंधित मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने एम्स देवघर में अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश देते हुए अग्निशमन पदाधिकारी को नियमित रूप से फायर मॉक ड्रिल आयोजित कराने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही एम्स देवघर में जलापूर्ति को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि पुनासी परियोजना या किसी अन्य वैकल्पिक माध्यम से एम्स देवघर में निर्बाध जलापूर्ति की संभावनाओं की तकनीकी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि जिला स्तर पर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
इसके अलावा एम्स देवघर से जुड़े संपर्क पथ, बाउंड्री वॉल, विद्युत आपूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन सभी मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
न्यायालयीन प्रक्रिया में गंभीरता से कार्य करने का निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने दो टूक कहा कि जिन मामलों में कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया जाना है, उनमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे समयसीमा के भीतर तथ्यों के साथ प्रभावी प्रतिवेदन न्यायालय में समर्पित करें।
उन्होंने कहा कि न्यायालयीन मामलों के निष्पादन में केवल औपचारिकता निभाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समुचित तथ्यों, दस्तावेजों एवं विधिक सलाह के साथ ठोस कार्रवाई जरूरी है। साथ ही प्रत्येक विभाग को अपने-अपने मामलों की नियमित समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

जवाबदेही तय करने पर जोर
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विधिक प्रक्रियाओं में किसी भी स्तर पर शिथिलता नहीं होनी चाहिए। सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करते हुए न्यायालयीन वादों के निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में मौजूद रहे कई वरिष्ठ अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर समाहर्ता हीरा कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी देवघर रवि कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमर कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, यातायात प्रभारी पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता विद्युत प्रमंडल देवघर, जिला शिक्षा अधीक्षक, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल देवघर, विभिन्न प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता, सभी अंचलों के अंचलाधिकारी, डीएमएफटी की टीम, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
यह बैठक न केवल न्यायालय से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही को भी मजबूती प्रदान करती है। उपायुक्त द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों से यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए आम जनता को समय पर न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

