By: Vikash Kumar (Vicky)
गुर्दे की पथरी क्या है और क्यों बढ़ रही है यह समस्या
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत और गलत खानपान के कारण गुर्दे की पथरी एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। गुर्दे में जमा हुए खनिज और लवण जब कठोर रूप ले लेते हैं, तो पथरी बनती है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय रहते पहचान न होने पर यह असहनीय दर्द और जटिलताओं का कारण बन सकती है।

कमर और पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द
गुर्दे की पथरी का सबसे प्रमुख संकेत अचानक उठने वाला तेज दर्द है। यह दर्द कमर के एक तरफ, पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैल सकता है। कई बार दर्द इतना असहनीय होता है कि व्यक्ति को चलना या बैठना तक मुश्किल हो जाता है। दर्द का आना-जाना पथरी की स्थिति और उसके मूवमेंट पर निर्भर करता है।
पेशाब करते समय जलन और दर्द
अगर पेशाब के दौरान जलन, चुभन या तेज दर्द महसूस हो रहा है, तो यह गुर्दे की पथरी का संकेत हो सकता है। पथरी जब मूत्र नली से गुजरती है, तो अंदरूनी परत में सूजन और जलन पैदा होती है, जिससे पेशाब करना बेहद कष्टदायक हो जाता है।
पेशाब में खून या रंग में बदलाव
गुर्दे की पथरी के कारण पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई दे सकता है। यह मूत्र नली में हल्की चोट लगने की वजह से होता है। कई मामलों में खून नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन जांच में इसका पता चल जाता है।

बार-बार पेशाब आना लेकिन मात्रा कम होना
अगर आपको बार-बार पेशाब लग रही है लेकिन हर बार बहुत कम मात्रा में पेशाब हो रहा है, तो यह भी पथरी का संकेत हो सकता है। खासतौर पर रात के समय यह समस्या अधिक महसूस हो सकती है, जिससे नींद भी प्रभावित होती है।
मतली, उल्टी और बुखार
गंभीर स्थिति में गुर्दे की पथरी के साथ मतली, उल्टी और हल्का या तेज बुखार भी हो सकता है। अगर पथरी के साथ संक्रमण हो जाए, तो बुखार और ठंड लगने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जो तुरंत चिकित्सा सलाह लेने का संकेत हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है
अगर दर्द असहनीय हो, पेशाब रुक-रुक कर आए, तेज बुखार हो या पेशाब में लगातार खून दिखे, तो देरी न करें। समय पर जांच और इलाज से पथरी को दवाओं या सरल प्रक्रियाओं से ठीक किया जा सकता है।
पथरी से बचाव के लिए क्या करें
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक और अधिक प्रोटीन युक्त भोजन सीमित करना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना गुर्दे की पथरी से बचाव में मदद करता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण, दर्द या समस्या होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

