By: Vikash Kumar (Vicky)
लखनऊ: अखिलेश यादव ने प्रयागराज माघ मेला विवाद पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रयागराज प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य संतों के साथ किए गए दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है। अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए पूछा, “क्या एक ‘योगी’ की सरकार में संतों पर लाठियां चलना और उनका अपमान होना शोभा देता है?”

माघ मेला विवाद: क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में कुछ दिनों पहले हुई एक घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। घटना के अनुसार, जब संतों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी माघ मेला क्षेत्र में पहुंचे, तो प्रशासन ने उन्हें मंच पर चढ़ने से रोका और उन्हें अपमानित किया। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में संतों ने कड़ा विरोध जताया। इसके बाद, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, और कुछ संतों पर लाठियां भी चलाईं।
यह घटना संतों और प्रशासन के बीच तनाव को बढ़ा सकती है, जबकि माघ मेला जैसे धार्मिक आयोजन में आम तौर पर शांति और श्रद्धा का माहौल होता है। इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा आलोचना प्रशासन की कार्रवाई की हुई है, जिसको लेकर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अखिलेश यादव की तीखी आलोचना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ का यह कौन सा ‘योग’ है, जिसमें संतों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है? क्या एक संतों का अपमान और उन पर लाठी चलाना योगी सरकार की नीति है?” अखिलेश ने आरोप लगाया कि इस घटना ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता की धज्जियां उड़ाईं हैं।
उन्होंने कहा कि यह घटना केवल संतों का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे समाज और धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली है। उनका कहना था कि सरकार को जल्द से जल्द इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए और संतों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल
अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम के बाद सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल किया कि अगर उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार है, तो क्यों संतों के सम्मान में कमी आई है। उन्होंने कहा, “जो सरकार संतों का सम्मान नहीं कर सकती, वह राज्य का विकास कैसे कर सकती है?” अखिलेश का कहना था कि माघ मेला एक पवित्र आयोजन है, जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं और प्रशासन को शांति और सौहार्द्र बनाए रखना चाहिए था, न कि इस तरह की घटनाओं से तनाव पैदा करना। उनका आरोप था कि योगी सरकार ने धार्मिक भावनाओं से खेलने की कोशिश की है और इसे पूरी तरह से राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा है।
माघ मेला: प्रशासन की जिम्मेदारी
माघ मेला को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बेहद अहम है, क्योंकि यह आयोजन भारत के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। सुरक्षा, स्वच्छता और शांति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन, इस विवाद ने प्रशासन के कामकाजी तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। जिस तरह से संतों और उनके समर्थकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, उसे लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
संतों की प्रतिक्रिया
संतों ने इस घटना के बाद तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी ने कहा कि प्रशासन का यह कदम उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि माघ मेला जैसे धार्मिक आयोजन में संतों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई से समाज में तनाव पैदा हो सकता है।
वहीं, कुछ अन्य संतों ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राज्य सरकार की नीति के खिलाफ बताया और कहा कि इस तरह का व्यवहार समाज में गलत संदेश देता है।

सरकार की सफाई
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विवाद पर सफाई दी है। सरकार ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और प्रशासन ने अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान कोई अतिक्रमण नहीं किया था। सरकार ने संतों के साथ किए गए व्यवहार पर खेद जताया, लेकिन संतों द्वारा प्रशासन के खिलाफ की गई आलोचना को भी असमर्थित किया।
अखिलेश यादव का तर्क
अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की विफलताओं से जोड़ते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार को इस बार भी संतों और साधुओं का अपमान करने के कारण कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन का व्यवहार बेहद संवेदनशील होना चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि यह घटना केवल प्रशासन की चूक नहीं है, बल्कि यह योगी सरकार की नीतियों और उनके दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। उनका आरोप था कि सरकार धार्मिक आयोजनों में भी अपनी राजनीतिक सोच को थोपने का काम करती है, जो समाज में तनाव और असहमति को बढ़ाता है।
प्रयागराज माघ मेला में संतों पर लाठीचार्ज की घटना ने प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अखिलेश यादव ने इस पर सवाल उठाते हुए सरकार की निंदा की है, और योगी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह संतों और धार्मिक आयोजनों के प्रति संवेदनशील नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, जो आगे आने वाले दिनों में और भी गंभीर हो सकता है।

