By: Vikash Kumar (Vicky)
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। लूला ने आरोप लगाया कि ट्रंप वैश्विक व्यवस्था को अपनी निजी जागीर की तरह चलाना चाहते हैं और वे संयुक्त राष्ट्र जैसी एक नई संस्था बनाने की सोच रहे हैं, जिस पर उनका पूरा नियंत्रण हो। लूला के इस बयान को मौजूदा वैश्विक राजनीतिक हालात में बहुपक्षीय व्यवस्था के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

लूला दा सिल्वा ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया इस समय एक गंभीर राजनीतिक और कूटनीतिक संकट से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और सहमति की जगह एकतरफा फैसलों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा है।
‘बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है’
ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसलिए बनाई गई थीं ताकि देश आपसी संवाद और सहयोग से समस्याओं का समाधान कर सकें। लेकिन हाल के वर्षों में कुछ ताकतवर नेता इन संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
लूला ने ट्रंप का नाम लिए बिना इशारों-इशारों में कहा,
“कुछ लोग खुद को दुनिया का मालिक समझने लगे हैं। वे ऐसी संस्थाएं बनाना चाहते हैं जो सिर्फ उनके हितों की रक्षा करें, न कि पूरी मानवता की।”

‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर विवाद
लूला का यह बयान ट्रंप द्वारा कथित तौर पर प्रस्तावित किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर आया है। आलोचकों का कहना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है और वैश्विक निर्णय-प्रक्रिया को कुछ गिने-चुने देशों या नेताओं के हाथ में सौंप सकती है।
ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा कि शांति किसी एक व्यक्ति या देश के आदेश से नहीं आती, बल्कि इसके लिए संवाद, समझौता और आपसी सम्मान जरूरी है।
अमेरिकी राजनीति पर सीधा संदेश
लूला दा सिल्वा का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक राजनीति में चर्चा के केंद्र में हैं। ट्रंप पहले भी संयुक्त राष्ट्र, नाटो और जलवायु समझौतों जैसी बहुपक्षीय पहलों की आलोचना कर चुके हैं।लूला ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दुनिया ताकत की राजनीति के रास्ते पर चली, तो इसका खामियाजा छोटे और विकासशील देशों को भुगतना पड़ेगा।

ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण की भूमिका
ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के समूह ब्रिक्स (BRICS) का जिक्र करते हुए लूला ने कहा कि वैश्विक दक्षिण को अब ज्यादा मजबूत और एकजुट आवाज बनानी होगी। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में सभी देशों की बराबर हिस्सेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“दुनिया को किसी एक देश की जागीर नहीं बनने दिया जा सकता। हमें ऐसी व्यवस्था चाहिए जो न्यायपूर्ण, संतुलित और सभी के लिए स्वीकार्य हो।”
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि लूला का बयान केवल ट्रंप पर हमला नहीं है, बल्कि यह एकतरफा वैश्विक नेतृत्व मॉडल के खिलाफ चेतावनी भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं कमजोर हुईं, तो अंतरराष्ट्रीय विवाद और युद्धों का खतरा बढ़ सकता है।

ब्राजील की विदेश नीति का संकेत
लूला दा सिल्वा के इस बयान से यह भी साफ होता है कि ब्राजील आने वाले समय में बहुपक्षीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता देगा। ब्राजील खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है जो संवाद और शांति के जरिए वैश्विक समस्याओं का समाधान चाहता है।
डोनाल्ड ट्रंप के कथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा का बयान वैश्विक राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। यह बयान सिर्फ अमेरिका की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या भविष्य सहयोग की राजनीति का होगा या एकतरफा ताकत का।

