By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने एक ऐसे जांबाज अधिकारी को सम्मानित किया, जिसकी कहानी देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों में से एक ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके साहस और नेतृत्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत की वीरता अब सिर्फ जमीन या युद्ध के मैदानों तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की असीम ऊंचाइयों तक पहुंच चुकी है।

कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान जैसे ही ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का नाम घोषित हुआ, पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राष्ट्रपति द्वारा अशोक चक्र प्रदान किए जाने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भारत भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंतरिक्ष मिशन में अद्वितीय साहस
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान उनके उस असाधारण साहस, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा के लिए दिया गया, जो उन्होंने उच्च जोखिम वाले अंतरिक्ष मिशनों और रणनीतिक अभियानों के दौरान दिखाया। अत्यंत जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने न केवल मिशन को सफल बनाया, बल्कि कई बहुमूल्य जानकारियों और संसाधनों को भी सुरक्षित रखा।

सेना सूत्रों के अनुसार, मिशन के दौरान तकनीकी चुनौतियां, सीमित संसाधन और समय का दबाव लगातार बना हुआ था। ऐसे में ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने अपने अनुभव, प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए स्थिति को संभाला और मिशन को सुरक्षित अंजाम तक पहुंचाया।
बचपन से आसमान तक का सफर
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। एक साधारण परिवार से आने वाले शुभांशु बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना देखते थे। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने वायुसेना में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन के दम पर उन्होंने भारतीय वायुसेना में अपनी जगह बनाई।

फाइटर पायलट के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया और अंतरिक्ष से जुड़े अभियानों में अहम भूमिका निभाई। उनके साथी अधिकारी बताते हैं कि शुभांशु हमेशा जोखिम भरे कामों के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन हर कदम पूरी योजना और रणनीति के साथ उठाते हैं।
प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि उनका साहस और समर्पण ‘नए भारत’ की शक्ति और आत्मविश्वास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “शुभांशु शुक्ला जैसे अधिकारी युवाओं को यह सिखाते हैं कि सपने कितने भी ऊंचे क्यों न हों, उन्हें पूरा किया जा सकता है।”

रक्षा मंत्री ने भी इस अवसर पर कहा कि भारतीय सशस्त्र बल अब तकनीक, विज्ञान और साहस का अद्भुत संगम बन चुके हैं। उन्होंने ग्रुप कैप्टन शुक्ला को आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल बताया।
परिवार और साथियों में गर्व
इस सम्मान के बाद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के परिवार में खुशी की लहर है। उनके माता-पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने देश का नाम रोशन किया। वायुसेना के अधिकारियों और जवानों ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे बल के लिए गर्व का क्षण है।

युवाओं के लिए संदेश
अशोक चक्र प्राप्त करने के बाद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो देश की सेवा में लगा हुआ है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कठिनाइयों से डरें नहीं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें।

नया भारत, नई ऊंचाइयां
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र इस बात का प्रतीक है कि भारत अब भविष्य की युद्ध प्रणाली, अंतरिक्ष सुरक्षा और तकनीकी श्रेष्ठता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह सम्मान आने वाले समय में भारत की अंतरिक्ष और रक्षा रणनीति को और मजबूत करेगा।

77वें गणतंत्र दिवस पर यह सम्मान देश को यह संदेश देता है कि भारत की वीरता अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों तक फैली हुई है।

