By: Vikash Kumar (Vicky)
सेवानिवृत्त सेना व केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती से अपराध नियंत्रण, उग्रवाद निरोध और कानून-व्यवस्था होगी और मजबूत
पटना। बिहार सरकार ने राज्य की कानून – व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम निर्णय लिया है। वित्तीय वर्ष 2026–27 में बिहार पुलिस के तहत 17,000 पदों पर सेवानिवृत्त सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की अनुबंध आधारित भर्ती की जाएगी। इस फैसले से विशेष सशस्त्र पुलिस (SAP) बल को नई ताकत मिलेगी और अपराध नियंत्रण, उग्रवाद से निपटने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

राज्य सरकार का मानना है कि सेना और अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त जवानों के पास अनुशासन, रणनीतिक कौशल और जमीनी अनुभव होता है, जिसका सीधा लाभ पुलिस व्यवस्था को मिलेगा। खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और शहरी अपराध नियंत्रण में इन जवानों की भूमिका बेहद अहम साबित हो सकती है।
SAP बल को मिलेगा अनुभवी नेतृत्व
बिहार में SAP बल राज्य की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। उग्रवाद, संगठित अपराध, वीआईपी सुरक्षा, दंगा नियंत्रण और आपात स्थितियों में SAP की अहम भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्त सैनिकों की तैनाती से SAP बल का ऑपरेशनल अनुभव और अनुशासनात्मक क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कार्य कर चुके जवान कठिन परिस्थितियों में काम करने के अभ्यस्त होते हैं। वे आधुनिक हथियारों के संचालन, रणनीतिक प्लानिंग और टीमवर्क में दक्ष होते हैं। ऐसे में बिहार पुलिस को एक ऐसा मानव संसाधन मिलेगा, जिसे लंबा प्रशिक्षण देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
अपराध नियंत्रण में मिलेगी मजबूती
राज्य में बढ़ते साइबर अपराध, संगठित गिरोहों की गतिविधियां और कुछ इलाकों में उग्रवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। 17,000 अनुभवी जवानों की तैनाती से पुलिस की गश्ती, छापेमारी और खुफिया तंत्र को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनुबंध पर नियुक्त किए जाने वाले ये जवान अपराधियों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई में पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ने से अपराधियों में भय का माहौल बनेगा।
उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में बड़ा असर
बिहार के कुछ जिलों में अब भी उग्रवादी गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। इन क्षेत्रों में पहले से ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। अब जब उन्हीं बलों से सेवानिवृत्त जवान SAP में शामिल होंगे, तो स्थानीय स्तर पर उग्रवाद निरोधक अभियानों को और धार मिलेगी।

सेवानिवृत्त जवान स्थानीय पुलिस को रणनीतिक इनपुट देने के साथ-साथ जमीनी ऑपरेशन में मार्गदर्शन भी कर सकेंगे। इससे जवानों की सुरक्षा बढ़ेगी और अभियानों की सफलता दर भी बेहतर होगी।
अनुबंध आधारित भर्ती का मॉडल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह भर्ती पूरी तरह अनुबंध आधारित होगी। चयन प्रक्रिया में शारीरिक फिटनेस, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव को प्राथमिकता दी जाएगी। अनुबंध की अवधि और सेवा शर्तें अलग-अलग पदों के अनुसार तय की जाएंगी।
सरकार का कहना है कि इस मॉडल से राज्य पर स्थायी वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा और जरूरत के अनुसार अनुभवी मानव संसाधन उपलब्ध रहेगा। साथ ही, सेवानिवृत्त जवानों को भी सम्मानजनक रोजगार का अवसर मिलेगा।

पुलिस बल का मनोबल होगा ऊंचा
बिहार पुलिस के भीतर भी इस फैसले को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। अनुभवी सैनिकों के साथ काम करने से स्थानीय पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण, अनुशासन और कार्यशैली में सुधार का मौका मिलेगा। इससे समग्र रूप से पुलिस बल का मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह पहल “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में काम करेगी और सीमित संसाधनों में अधिक प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।
कानून-व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बिहार में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि निवेश, उद्योग और सामाजिक विकास को गति मिल सके। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से आम नागरिकों में विश्वास बढ़ेगा और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को मजबूती मिलेगी।
2026–27 में प्रस्तावित यह भर्ती बिहार पुलिस के इतिहास में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। यदि योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में अन्य राज्यों के लिए भी यह मॉडल मिसाल बन सकता है।
