By: Vikash Kumar (Vicky)
वास्तु शास्त्र में घर या फ्लैट की दिशा को बहुत अहम माना गया है। अक्सर यह धारणा बनी हुई है कि अगर फ्लैट का मुख्य दरवाजा गलत दिशा में हो, खासतौर पर दक्षिण दिशा में, तो वह अशुभ होता है और वहां रहने वाले लोगों को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार यह पूरी तरह सच नहीं है। कुछ खास नियमों और संतुलन के साथ दक्षिण मुखी फ्लैट भी पूरी तरह शुभ और लाभकारी बन सकता है।

दक्षिण दिशा को लेकर फैली गलतफहमी
दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा जाता है, इसी वजह से लोग दक्षिण मुखी फ्लैट को अशुभ मान लेते हैं। जबकि वास्तु शास्त्र में ऐसा स्पष्ट बताया गया है कि केवल दिशा के आधार पर किसी घर को अशुभ नहीं कहा जा सकता। अगर दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार सही स्थान और उचित अनुपात में बना हो, तो उसका नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता है।
दक्षिण मुखी फ्लैट कब नहीं माना जाता अशुभ
यदि दक्षिण दिशा में मुख्य दरवाजा बिल्कुल दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम कोने में न होकर मध्य से थोड़ा हटकर सही वास्तु पदों में स्थित हो, तो उसे दोषपूर्ण नहीं माना जाता। इसके अलावा अगर फ्लैट में उत्तर और पूर्व दिशा खुली और हल्की हो, तो दक्षिण दिशा का प्रभाव संतुलित हो जाता है। सही रोशनी, हवा और ऊर्जा का प्रवाह दक्षिण मुखी फ्लैट को भी शुभ बना सकता है।

मुख्य दरवाजे से जुड़े वास्तु नियम
मुख्य दरवाजा हमेशा मजबूत, साफ और अच्छी स्थिति में होना चाहिए। दरवाजे के सामने कोई बड़ा अवरोध, कूड़ा, सीढ़ियां या बंद दीवार नहीं होनी चाहिए। अगर दक्षिण दिशा में दरवाजा है, तो उस पर शुभ प्रतीक, नाम पट्ट और पर्याप्त रोशनी होना सकारात्मक माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।

खिड़की की सही दिशा क्या हो
वास्तु शास्त्र के अनुसार फ्लैट में खिड़कियां उत्तर और पूर्व दिशा में अधिक होनी चाहिए। इससे सूर्य की सकारात्मक किरणें और ताजी हवा घर में प्रवेश करती है। उत्तर दिशा से धन की ऊर्जा और पूर्व दिशा से स्वास्थ्य व प्रगति की ऊर्जा आती है। दक्षिण और पश्चिम दिशा में खिड़कियां सीमित और छोटी होनी चाहिए, ताकि नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह न बढ़े।

बालकनी की दिशा का महत्व
बालकनी के लिए उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा में बालकनी होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति मिलती है। दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में बालकनी होने पर खर्च बढ़ने और स्थिरता में कमी की आशंका बताई जाती है, लेकिन अगर उत्तर और पूर्व दिशा खुली हो, तो इसका असर कम हो जाता है।

दक्षिण मुखी फ्लैट को शुभ बनाने के आसान उपाय
अगर फ्लैट दक्षिण मुखी है, तो उत्तर-पूर्व कोना हमेशा साफ, हल्का और खुला रखें। वहां पूजा स्थान या पानी से जुड़ी चीजें रखना लाभकारी माना जाता है। भारी फर्नीचर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें, इससे स्थिरता आती है। घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह बनाए रखें, ताकि ऊर्जा संतुलन बना रहे। कुल मिलाकर, वास्तु शास्त्र यह स्पष्ट करता है कि केवल मुख्य दरवाजे की दिशा के कारण किसी फ्लैट को अशुभ नहीं कहा जा सकता। सही वास्तु संतुलन, खिड़की और बालकनी की उचित दिशा और ऊर्जा के प्रवाह से दक्षिण मुखी फ्लैट भी सुख-समृद्धि और शांति देने वाला बन सकता है।

यह लेख वास्तु शास्त्र की सामान्य मान्यताओं और ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। किसी भी प्रकार के वास्तु परिवर्तन या निर्माण से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
