By: Vikash Kumar (Vicky)
Falgun Amavasya 2026 को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन देखा जा रहा है कि यह 16 फरवरी को है या 17 फरवरी को। हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि चंद्रमा की स्थिति के आधार पर तय होती है, इसलिए कई बार तिथि दो दिनों में फैल जाती है और भ्रम की स्थिति बनती है। यदि आप भी फाल्गुन अमावस्या के दिन पवित्र स्नान, दान-पुण्य या पितरों के निमित्त पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानना बेहद जरूरी है।

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन अमावस्या की तिथि
फरवरी 2026 में अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 फरवरी की रात से मानी जा रही है और इसका समापन 17 फरवरी को होगा। उदया तिथि और स्नान-दान के महत्व को देखते हुए अधिकांश पंचांगों में फाल्गुन अमावस्या का व्रत और धार्मिक अनुष्ठान 17 फरवरी 2026 को करना अधिक शुभ माना जा रहा है।

हालांकि, स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार कुछ स्थानों पर 16 फरवरी को भी अमावस्या का पालन किया जा सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के अनुसार पुष्टि करना उचित रहेगा।

फाल्गुन अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना तथा पितरों की शांति के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए दान-पुण्य से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु, शिव तथा पितरों का स्मरण करते हैं।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त आमतौर पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के बाद तक विशेष फलदायी माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना सर्वोत्तम माना जाता है, लेकिन यदि नदी उपलब्ध न हो तो घर पर ही स्नान करके भी पूजा-पाठ किया जा सकता है। इसके बाद काले तिल, वस्त्र, अन्न, गुड़ और धन का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना और दीपक जलाना भी कई लोग इस दिन करते हैं।

फाल्गुन अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व भी बेहद खास है क्योंकि यह फाल्गुन माह की अंतिम अमावस्या होती है और होली से पहले आने के कारण इसे आत्मशुद्धि और मन की नकारात्मकता दूर करने का अवसर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन ध्यान, जाप और साधना करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं कम होती हैं।

जो लोग पितृ दोष या पारिवारिक समस्याओं से परेशान हैं, वे इस दिन पितरों के लिए तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराकर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कई लोग इस दिन घर में हवन या विशेष पूजा भी करते हैं जिससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग गणनाओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और पंचांगों में तिथि और मुहूर्त में अंतर संभव है, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लें।


