By: Vikash Kumar (Vicky)
सीबीएसई (CBSE) ने परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2026 से कक्षा 12वीं की उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पारंपरिक तरीके से न होकर डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (On-Screen Marking) कहा जा रहा है, जिसके जरिए कॉपियों की जांच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर की जाएगी।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज, सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। सीबीएसई का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन से परीक्षा परिणामों में देरी कम होगी और छात्रों को निष्पक्ष अंक मिल सकेंगे।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें परीक्षा के बाद उत्तर-पुस्तिकाओं को स्कैन कर सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद परीक्षक अपने लॉगिन के माध्यम से इन कॉपियों को ऑनलाइन देखकर अंक प्रदान करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर या लैपटॉप पर की जाती है, जिससे कॉपी खोने, बदलने या गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो जाती है।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
परीक्षा के बाद सभी उत्तर-पुस्तिकाओं को विशेष स्कैनिंग सेंटर पर स्कैन किया जाएगा। प्रत्येक कॉपी को एक यूनिक कोड दिया जाएगा, जिससे परीक्षक को छात्र की पहचान नहीं होगी। इससे मूल्यांकन पूरी तरह निष्पक्ष रहेगा। परीक्षक लॉगिन आईडी और पासवर्ड के जरिए पोर्टल पर कॉपी देखेंगे और वहीं अंक दर्ज करेंगे। सिस्टम स्वतः टोटलिंग करेगा, जिससे अंक जोड़ने में मानवीय गलती की संभावना नहीं रहेगी।

पारदर्शिता और निष्पक्षता में बढ़ोतरी
डिजिटल मूल्यांकन का सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता है। कॉपी के हर पेज का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। यदि भविष्य में कोई छात्र री-चेकिंग या री-इवैल्यूएशन की मांग करता है, तो उसी डिजिटल कॉपी की दोबारा जांच संभव होगी। इससे विवाद और शिकायतें कम होंगी।

मूल्यांकन में तेजी
पारंपरिक व्यवस्था में कॉपियां एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती थीं, जिससे समय लगता था। डिजिटल सिस्टम में यह प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। परीक्षक देश के किसी भी हिस्से से कॉपी जांच सकेंगे। इससे रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज होगी।

त्रुटियों में कमी
अंक जोड़ने में गलती, पेज छूट जाना या गलत एंट्री जैसी समस्याएं अक्सर सामने आती थीं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग में यह समस्याएं लगभग समाप्त हो जाएंगी, क्योंकि सॉफ्टवेयर हर एंट्री को मॉनिटर करेगा।
परीक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
सीबीएसई इस नई व्यवस्था के लिए शिक्षकों और परीक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देगा। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपी जांचने, अंक दर्ज करने और सिस्टम के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इससे मूल्यांकन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

पर्यावरण को भी फायदा
डिजिटल मूल्यांकन से कागज की खपत कम होगी और कॉपियों के परिवहन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
छात्रों के लिए परीक्षा देने की प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन कॉपी जांचने का तरीका बदलेगा। छात्रों को ज्यादा निष्पक्ष और सटीक मूल्यांकन का लाभ मिलेगा। साथ ही, परिणाम समय पर जारी होने की संभावना बढ़ेगी।

पहले भी हो चुका है प्रयोग
सीबीएसई ने इससे पहले कुछ परीक्षाओं और प्रोजेक्ट्स में डिजिटल मूल्यांकन का परीक्षण किया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब इसे 12वीं बोर्ड परीक्षा में लागू करने का फैसला लिया गया है।

भविष्य में अन्य कक्षाओं में भी लागू होने की संभावना
यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो भविष्य में कक्षा 10वीं और अन्य परीक्षाओं में भी डिजिटल मूल्यांकन लागू किया जा सकता है।

सीबीएसई का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग से न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी, बल्कि छात्रों को भी निष्पक्ष परिणाम मिल सकेंगे। वर्ष 2026 से शुरू होने वाली यह व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
