By: Vikash Kumar (Vicky)
गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री संजय कुमार ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः शुरू किया जाएगा और राज्य में नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी। यह निर्णय सरकार की कृषि और ग्रामीण विकास नीति के तहत लिया गया है, जिससे गन्ना किसानों को लाभ और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

1. बंद चीनी मिलों का पुनः संचालन:
बिहार में कई सालों से कई चीनी मिलें बंद पड़ी थीं, जिससे गन्ना किसानों को भारी रोजगार और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने स्पष्ट कहा कि इन्हें जल्द ही फिर से चालू किया जाएगा, जिससे किसान राहत महसूस करेंगे और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

2. नई चीनी मिलों की स्थापना:
सरकार केवल बंद पड़े मिलों को ही पुनः नहीं चालू करेगी, बल्कि राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना पर भी कार्य करेगी। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

3. किसानों के लिए बड़ी राहत:
गन्ना किसानों को इसके सकारात्मक प्रभाव का सीधा लाभ मिलेगा। गन्ना उत्पादन एक नकदी फसल है और इसके लिए स्थानीय चीनी मिल का होना किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक है। बंद मिलों के पुनः चालन से गन्ना की खेती फिर से आकर्षक बनेगी और किसान अपने उत्पादन के लिए उचित दाम प्राप्त कर सकेंगे।

बैकग्राउंड व विस्तृत विश्लेषण:
बिहार एक समय देश में चीनी उत्पादन की महत्वपूर्ण राज्य के रूप में जाना जाता था, लेकिन पिछले दशक में कई मिलें बंद हो गईं, जिससे गन्ना किसानों की स्थिति कमजोर हुई। विगत वर्षों में राज्य के कई हिस्सों में गन्ना की खेती भी प्रभावित हुई और किसानों ने अन्य फसलों की ओर रुख किया। हालांकि सरकार ने 2025 में नई नीति के तहत बंद मिलों को फिर से चालू करने और नई मिलों की स्थापना का निर्णय लिया है, ताकि राज्य की गन्ना अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा सके। इस योजना के तहत विशेषज्ञों और अधिकारियों की एक विशेष टीम मतभेदों और अड़चनों को दूर करने के लिए काम कर रही है।

सरकार की तैयारी और रणनीति:
सरकार ने मिलों के पुनः संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है जिसमें:
पुरानी मशीनरी का नवीनीकरण या प्रतिस्थापन
सहकारी समितियों के माध्यम से प्रबंधन
मिलों के संचालन के लिए भूमि और संसाधनों का पुनर्गठन
किसानों के बकाया भुगतान को तुरंत निपटाने की व्यवस्था
जैसे कई प्रमुख कदम शामिल हैं।
यह पहल बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

किसानों की प्रतिक्रिया:
बंद चीनी मिलों के पुनः संचालन के निर्णय की खबर मिलते ही गन्ना किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। किसानों ने कहा कि इससे उनकी उपज को बाजार मिलेगा, और वे गन्ना खेती को पुनः अपनाएंगे। इसके अतिरिक्त, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, जिससे युवा कार्य शक्ति को स्थिर व लाभकारी रोजगार मिलेगा। कई किसानों ने कहा कि जब मिलें बंद थीं, तो उन्हें गन्ना बेचने के लिए अन्य राज्यों या दूर के स्थानों पर ले जाना पड़ता था, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती थी और मुनाफा कम हो जाता था। अब जब स्थानीय मिलें फिर से चालू होंगी, तो उन्हें सबसे बड़ा लाभ मिलेगा।

सरकारी कार्यान्वयन की चुनौतियाँ:
हालाँकि निर्णय सकारात्मक है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ हैं:
बंद मिलों के पुरानी मशीनों को फिर से चालू करना
मिलों के लिए पर्याप्त कच्चा माल (गन्ना) की उपलब्धता
वित्तीय संसाधनों और सहकारी मॉडल का सफल प्रबंधन
मीठे और उपयुक्त बाजारों में प्रतिस्पर्धा
इन सब पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि योजना सफल हो सके।

बैंकर्स और उद्योग विशेषज्ञों की राय:
उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि योजना का सही तरीके से कार्यान्वयन किया जाता है तो यह राज्य के कृषि व औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन लाएगी। इससे न केवल स्थानीय कृषि को बढ़ावा मिलेगा बल्कि चीनी उत्पादन और स्थानीय व्यापार को भी जीवनदायिनी सहायता मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को मिलों के नवीनीकरण में आधुनिक तकनीक को अपनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मिलों का संचालन उच्च गुणवत्ता व दक्षता के साथ हो।

बिहार सरकार का यह कदम भविष्य की अर्थव्यवस्था, ग्रामीण विकास और कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव साबित होगा। राज्य सरकार और मंत्री संजय कुमार की यह पहल गन्ना किसानों की उम्मीदों को नई दिशा देगी और बिहार की कृषि को एक नया जीवन प्रदान करेगी।

