By: : Vikash Kumar (Vicky)
फरवरी में मौसम बदलने का असर
फरवरी का महीना मौसम के बदलाव का संकेत लेकर आता है। ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और गर्मी की हल्की शुरुआत महसूस होने लगती है। इस समय दिन में हल्की गर्माहट और सुबह-शाम ठंडी हवा शरीर के लिए चुनौती बन सकती है। आयुर्वेद के अनुसार ऋतु परिवर्तन के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार, एलर्जी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर इस मौसम में सही खान-पान और दिनचर्या का पालन किया जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

ऋतु संधि क्या है और क्यों जरूरी है सावधानी
आयुर्वेद में फरवरी जैसे मौसम को “ऋतु संधि” कहा गया है, यानी एक मौसम से दूसरे मौसम में जाने का समय। इस दौरान शरीर में कफ दोष बढ़ने लगता है, जिससे गले में खराश, नाक बहना, भारीपन और सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए आयुर्वेद संतुलित भोजन, गर्म पानी का सेवन और नियमित व्यायाम पर विशेष जोर देता है। सुबह गुनगुना पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

सही खान-पान से बढ़ाएं इम्यूनिटी
ऋतु परिवर्तन के दौरान सबसे जरूरी है कि खान-पान हल्का और सुपाच्य रखा जाए। तली-भुनी चीजों से दूरी बनाकर रखें और हरी सब्जियां, मौसमी फल, सूप और दलिया जैसी चीजें डाइट में शामिल करें। अदरक, तुलसी और काली मिर्च जैसी आयुर्वेदिक चीजें शरीर को गर्म रखती हैं और इम्यूनिटी बढ़ाती हैं। रात में भारी भोजन करने से बचें और समय पर सोने की आदत डालें ताकि शरीर को पर्याप्त आराम मिल सके।

कपड़े और दिनचर्या का रखें खास ध्यान
आयुर्वेद यह भी सलाह देता है कि मौसम के हिसाब से कपड़े पहनें। सुबह और रात में हल्की ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनना जरूरी है, वहीं दिन में बहुत ज्यादा गर्म कपड़े पहनने से शरीर में पसीना आकर सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ सकता है। नियमित योग और प्राणायाम करने से शरीर का संतुलन बना रहता है और मानसिक तनाव भी कम होता है।

त्वचा और शरीर की देखभाल क्यों जरूरी
इस मौसम में त्वचा और बालों की देखभाल भी जरूरी है क्योंकि ठंड और गर्मी के बीच का बदलाव त्वचा को रूखा बना सकता है। नारियल तेल या तिल के तेल से हल्की मालिश करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और रक्त संचार बेहतर होता है। साथ ही, दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।

छोटी सावधानियां, बड़ी सुरक्षा
आयुर्वेद के अनुसार ऋतु परिवर्तन के समय छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं। सही आहार, नियमित दिनचर्या, योग और घरेलू आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर फरवरी के मौसम में भी स्वस्थ और ऊर्जावान रहा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

