BY: Vikash Kumar (Vicky)
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित पालन नाथ शिव मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और चमत्कारी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान भोलेनाथ को झाड़ू और बैंगन अर्पित करते हैं। यह परंपरा सुनने में भले ही अलग लगे, लेकिन वर्षों से लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर की आस्था इतनी मजबूत है कि यहां आने वाले भक्तों की सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है।

लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी से बरवर रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर इतिहास और आस्था का अनोखा संगम है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में हुई थी और यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। समय के साथ यह स्थान भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। मंदिर का नाम पालन नाथ इसलिए पड़ा क्योंकि यह पालगांव क्षेत्र में स्थित है और यहां की पहचान पूरे इलाके में विशेष धार्मिक स्थल के रूप में की जाती है।

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां मनोकामना पूरी होने के बाद झाड़ू और बैंगन चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भोलेनाथ से प्रार्थना करता है, उसकी इच्छा पूरी होती है और आभार व्यक्त करने के लिए वह झाड़ू और बैंगन चढ़ाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी बड़ी संख्या में लोग इसे निभाते हैं। कई भक्त अपने जीवन की परेशानियों, आर्थिक संकट, स्वास्थ्य समस्याओं और पारिवारिक बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए यहां दर्शन करने आते हैं।

पालन नाथ शिव मंदिर में सावन के महीने में विशेष रौनक देखने को मिलती है। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत माहौल रहता है और दूर-दराज के जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक पर्वों पर भी यहां विशेष कार्यक्रम और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जिससे यह स्थान धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है।

मंदिर की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यहां की अद्भुत मान्यता और भक्तों का अटूट विश्वास है। कई लोगों का दावा है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है। हालांकि मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग भी यह कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा और सकारात्मक सोच है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में बदलाव महसूस करता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। किसी भी मान्यता या परंपरा को अपनाने से पहले अपनी श्रद्धा और समझ के अनुसार निर्णय लें।


