By: Vikash Kumar (Vicky)
धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है आज का दिन
13 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी का पावन महासंयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान और पूजा-पाठ करने से साधक के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज का दिन आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।

आज की तिथि, मास और संवत् की जानकारी
आज कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है और पूर्णिमांत मास के अनुसार फाल्गुन मास चल रहा है। संवत् 2082 के इस विशेष दिन शुक्रवार होने के कारण भी इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार कृष्ण एकादशी तिथि दोपहर 02 बजकर 25 मिनट तक रहेगी और इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी।

आज के योग और करण का महत्व
आज वज्र योग रात 03 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगा। वहीं बलव करण दोपहर 02 बजकर 25 मिनट तक और कौलव करण रात 03 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योग और करण का प्रभाव साधना, व्रत और पूजा-पाठ के कार्यों पर विशेष रूप से पड़ता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी
सूर्योदय का समय सुबह 07 बजकर 01 मिनट और सूर्यास्त का समय शाम 06 बजकर 10 मिनट बताया गया है। चंद्रोदय सुबह 04 बजकर 53 मिनट और चंद्रास्त दोपहर 02 बजकर 10 मिनट पर होगा। इन समयों के आधार पर श्रद्धालु पूजा, व्रत और अन्य धार्मिक कार्यों की योजना बनाते हैं।

आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल सुबह 09 बजकर 08 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत और पूजा-पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।

आज के अशुभ समय की जानकारी
राहुकाल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। गुलिकाल सुबह 08 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 48 मिनट तक और यमगण्ड शाम 03 बजकर 23 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इन समयों में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।

आज का नक्षत्र और उसका प्रभाव
आज चंद्रदेव मूल नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो शाम 04 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगा। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु देव और देवता निरति माने जाते हैं। इस नक्षत्र के प्रभाव से व्यक्ति में अनुशासन, गंभीरता, दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता देखने को मिलती है, साथ ही कुछ लोगों में आक्रामक स्वभाव भी दिखाई दे सकता है।

कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ संक्रांति के दिन सूर्य देव की आराधना और विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं और दान-पुण्य करते हैं ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त हो सके। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या निर्णय से पहले अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार विशेषज्ञ या पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।


