शनि प्रदोष व्रत 2025 का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। हर माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, लेकिन जब यह तिथि शनिवार को पड़ती है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार 14 फरवरी शनिवार के दिन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने के कारण शनि प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बना है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव और शनिदेव की पूजा करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और नकारात्मक ग्रह प्रभावों से राहत मिलती है।

सिद्धि योग और विशेष ग्रह योग का प्रभाव
इस वर्ष शनि प्रदोष व्रत पर सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही कुंभ राशि में सूर्य, शुक्र और बुध ग्रह की युति से बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग और लक्ष्मी नारायण योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसे शुभ योग में की गई पूजा और व्रत का फल कई गुना अधिक मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

शनि प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन शनिवार को पड़ने पर इसमें शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शनिदेव को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है, इसलिए शिव की आराधना करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य कष्टकारी योग चल रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है।

त्रयोदशी तिथि और व्रत का समय
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 14 फरवरी को सुबह 4 बजकर 4 मिनट से हो रहा है और इसका समापन 15 फरवरी को दोपहर 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। उदया तिथि के अनुसार 14 फरवरी को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

शनि प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। यही समय शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 9 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 34 मिनट तक और अमृत काल दोपहर 1 बजकर 3 मिनट से 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि
व्रती को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवालय जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। प्रदोष काल में सूर्यास्त से पहले स्नान करके शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। यदि पंचामृत उपलब्ध न हो तो जल और दूध से भी अभिषेक किया जा सकता है। बेलपत्र, अक्षत, पुष्प, चंदन और धूप-दीप अर्पित करने के बाद मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ करना चाहिए। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें। शनिदेव को काले तिल, सरसों का तेल और काले या नीले वस्त्र अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

शिव पूजन के प्रमुख मंत्र
ॐ नमः शिवाय
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
ऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँ
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
शिव रुद्र मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
प्रदोष स्तुति
शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया। क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो॥
शिवजी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा॥

व्रत के दिन क्या करें और क्या न करें
इस दिन व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए और क्रोध, नकारात्मक सोच तथा अनावश्यक विवाद से दूर रहना चाहिए। जरूरतमंदों को दान देना और शाम के समय शिव मंदिर जाकर दीपदान करना शुभ माना जाता है। दिनभर सकारात्मक सोच और संयम बनाए रखना आध्यात्मिक लाभ बढ़ाता है।
शनि प्रदोष व्रत का जीवन पर प्रभाव
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। जिन लोगों के जीवन में बाधाएं, आर्थिक समस्याएं या मानसिक तनाव चल रहा हो, उन्हें इस दिन पूजा-अर्चना और मंत्र जाप से विशेष लाभ मिल सकता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्यक्तिगत निर्णय से पहले योग्य विद्वान या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
