By: Vikash Kumar (Vicky)
रांची: हेमन्त सोरेन ने राज्य में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हाथियों के हमले से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु न हो, यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की जान-माल की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों—रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका—में हाल के महीनों में हाथी हमलों से हुई लगभग 27 मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब झारखंड में बड़ी संख्या में हाथियों का विचलन होता है और वे जंगल से निकलकर ग्रामीण इलाकों में पहुंच जाते हैं, तो ऐसे में वन विभाग द्वारा अब तक कोई स्थायी और प्रभावी मेकैनिज्म क्यों विकसित नहीं किया गया।

प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभावी कदम
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में हाथियों द्वारा लगातार जान-माल की क्षति पहुंचाई जा रही है, वहां तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर ‘एलीफेंट रेस्क्यू टीम’ तैयार की जाए। इससे स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी और जानमाल की क्षति को कम किया जा सकेगा।

वन विभाग को निर्देशित किया गया कि ग्रामीणों को हाथी भगाने के लिए आवश्यक संसाधन—मशाल के लिए डीजल एवं किरासन तेल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन आदि—उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को यह बताया जाए कि हाथियों की गतिविधियों के दौरान किस प्रकार सावधानी बरतनी चाहिए।
क्विक रिस्पांस मेकैनिज्म और कुनकी हाथी
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि हाथी रेस्क्यू के लिए एक बेहतर ‘क्विक रिस्पांस मेकैनिज्म’ तैयार किया जा रहा है। विभाग द्वारा छह कुनकी हाथी मंगाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से भटके हुए हाथियों को नियंत्रित करने और ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, एलीफेंट रेस्क्यू विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की भी योजना है ताकि वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर समाधान विकसित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौती है, जिसका स्थायी समाधान निकालना जरूरी है।

12 दिनों के भीतर मुआवजा सुनिश्चित
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने वन विभाग को सख्त निर्देश दिया कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हाथी या अन्य वन्य जीव के हमले से होती है, तो पीड़ित परिवार को 12 दिनों के भीतर मुआवजे की पूरी राशि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कंपनसेशन देने में देरी पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि एनिमल अटैक से संबंधित मौजूदा नियमों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि पीड़ितों को त्वरित और न्यायसंगत राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर अपनी आजीविका के लिए खेती और पशुधन पर निर्भर रहते हैं। हाथी हमलों से न केवल मानव जीवन की हानि होती है, बल्कि फसल और पशुधन का भी भारी नुकसान होता है। ऐसे मामलों में सरकार पूरी सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पिछले 5 वर्षों का डेटा मांगा
मुख्यमंत्री ने वन विभाग को निर्देश दिया कि पिछले पांच वर्षों में हाथी हमलों से हुई मौतों (कैजुअल्टी) और दिए गए मुआवजे (कंपनसेशन) से संबंधित विस्तृत डेटा राज्य सरकार को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही राज्य के सभी एलीफेंट कॉरिडोर की मैपिंग करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि हाथियों के विचलन के प्रमुख मार्गों की पहचान कर पूर्व तैयारी की जा सके। उन्होंने कहा कि स्थायी दिव्यांगता, फसल नुकसान और पशुधन क्षति जैसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जाए और मुआवजा वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जाए।

हजारीबाग में एग्रेसिव हाथियों का झुंड
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हजारीबाग क्षेत्र में पांच हाथियों का एक झुंड काफी आक्रामक है। इन हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित हमलों को रोकने के लिए विभाग द्वारा 70 लोगों की टीम तैनात की गई है। वन विभाग फिलहाल अलर्ट मोड पर है और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष जैसी घटनाओं पर राज्य सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत, उचित मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समन्वय, तकनीक और स्थानीय भागीदारी के माध्यम से एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, पीसीसीएफ (हॉफ) संजीव कुमार, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) रवि रंजन, सीसीएफ (वाइल्डलाइफ) एस.आर. नाटेश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

