By: Vikash Kumar (Vicky)
पटना। बिहार में राशन कार्ड से जुड़ी बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी बनाने और वास्तविक जरूरतमंदों तक मुफ्त राशन पहुंचाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर छंटनी अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत करीब 33 लाख अपात्र राशन कार्डधारियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद अब केवल पात्र परिवारों को ही सरकार की मुफ्त राशन योजना का लाभ मिल सकेगा।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष सत्यापन अभियान में कई ऐसे लाभार्थी सामने आए, जो नियमों के अनुसार राशन योजना के पात्र नहीं थे, लेकिन लंबे समय से इसका लाभ उठा रहे थे। इनमें सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार और ऐसे लोग भी शामिल थे जिनकी आय पात्रता सीमा से अधिक थी। विभाग ने ऐसे सभी मामलों की पहचान कर सूची से उनके नाम हटाने का निर्णय लिया।

सत्यापन और e-KYC से हुआ खुलासा
राज्य सरकार ने राशन कार्डधारियों का आधार से मिलान और e-KYC प्रक्रिया को अनिवार्य किया था। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए, जहां या तो लाभार्थियों की जानकारी गलत थी या फिर वे पात्रता के मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी राशन लिया जा रहा था, जबकि कुछ लाभार्थियों ने आर्थिक स्थिति में सुधार होने के बावजूद कार्ड सरेंडर नहीं किया था।

इस डिजिटल सत्यापन से यह स्पष्ट हुआ कि मुफ्त राशन का लाभ बड़ी संख्या में अपात्र लोग भी उठा रहे थे। सरकार का मानना है कि इस कार्रवाई से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को उनका वास्तविक अधिकार मिल सकेगा।
पात्र लाभार्थियों को मिलेगा पूरा लाभ
सरकार की इस कार्रवाई के बाद राशन कार्ड सूची में जगह खाली हुई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब इन स्थानों पर नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजना का लाभ मिल सके। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें नोटिस भेजा गया है और यदि वे स्वयं को पात्र साबित करते हैं तो पुनः जांच के बाद उनका नाम सूची में जोड़ा जा सकता है। लेकिन यदि वे अपात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें राशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सख्त कदम
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, भविष्य में राशन कार्ड बनाने के लिए भी पात्रता मानदंडों की कड़ाई से जांच की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा। कई राज्यों में पहले भी इसी तरह के सत्यापन अभियान चलाए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंचे।

गरीबों को मिलेगा राहत
सरकार की इस कार्रवाई से उन गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से राशन कार्ड के लिए आवेदन करने के बावजूद सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। अब सूची से अपात्र लोगों के हटने के बाद नए पात्र परिवारों को जोड़ा जा सकेगा।

इसके अलावा, इस कदम से सरकार को भी आर्थिक बचत होगी, जिससे वह संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगी और अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचा सकेगी।
भविष्य में जारी रहेगा सत्यापन अभियान
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। समय-समय पर लाभार्थियों की पात्रता की जांच की जाएगी और यदि कोई व्यक्ति अपात्र पाया जाता है तो उसका नाम सूची से हटा दिया जाएगा।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति पात्र नहीं है, तो वह स्वयं आगे आकर राशन कार्ड सरेंडर कर दे। इससे जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सकेगा और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सकेगा।

पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्रवाई सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं में विश्वास बढ़ेगा, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में राशन भी मिल सकेगा।

बिहार सरकार का यह कदम सामाजिक न्याय और संसाधनों के सही वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के अभियान और भी तेज किए जा सकते हैं, ताकि किसी भी अपात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ न मिल सके।

