By: Vikash Kumar (Vicky)
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनावी माहौल गरमा गया है। निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सात अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही और प्रक्रियागत नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

क्या है SIR प्रक्रिया?
SIR यानी Special Intensive Revision एक विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान है, जिसके तहत नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और त्रुटियों को सुधारना शामिल होता है। यह प्रक्रिया चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कथित अनियमितताओं के आरोप
सूत्रों के अनुसार, कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए नाम जोड़ने में नियमों का पालन नहीं किया गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पक्षपात हुआ है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

TMC की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) ने कहा है कि आयोग की कार्रवाई से यह साबित होता है कि राज्य सरकार पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में है। पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि भाजपा चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।

BJP का आरोप
वहीं भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। भाजपा नेताओं ने मांग की है कि पूरे राज्य में SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को और सख्त कदम उठाने चाहिए।

राजनीतिक माहौल गरमाया
निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है।

निर्वाचन आयोग का रुख
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयोग ने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को नियमों के अनुसार और पूरी सावधानी से पूरा किया जाए।

विशेषज्ञों की राय
चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि SIR जैसी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए समय रहते कार्रवाई किया जाना आवश्यक था। उनका कहना है कि इससे भविष्य में अधिकारियों को सतर्क रहने का संदेश जाएगा।

आगे क्या?
अब सभी की नजर विभागीय जांच की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है, तो और भी सख्त कार्रवाई संभव है। राजनीतिक दलों की सक्रियता को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। सात अधिकारियों के निलंबन से यह स्पष्ट संकेत गया है कि चुनावी पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस मुद्दे पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में विभागीय जांच की रिपोर्ट से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

