By: Vikash Kumar (Vicky)
भारत में हवाई यात्रा के दौरान बढ़ती बदसलूकी और अनुशासनहीनता की घटनाओं पर अब सख्त लगाम लगने जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने फ्लाइट में दुर्व्यवहार करने वाले यात्रियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू करने का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नई नीति का उद्देश्य हवाई यात्रा को सुरक्षित, अनुशासित और यात्रियों के लिए तनावमुक्त बनाना है।

क्या है ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी?
DGCA के ड्राफ्ट के मुताबिक, उड़ान के दौरान किसी भी प्रकार की बदसलूकी—चाहे वह क्रू मेंबर से हो, सह-यात्रियों से हो या विमान की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी हो—उसे गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में आरोपी यात्री को ‘अनरूली पैसेंजर’ घोषित कर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इस पॉलिसी के तहत एयरलाइंस को अधिक अधिकार दिए जाएंगे, ताकि वे मौके पर ही कार्रवाई कर सकें। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
किन हरकतों पर होगी सख्ती?
ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि निम्न प्रकार की गतिविधियां सख्त कार्रवाई के दायरे में आएंगी—
फ्लाइट अटेंडेंट या पायलट के साथ अभद्र व्यवहार
शराब के नशे में हंगामा करना
सीट बेल्ट या सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन
सह-यात्रियों को धमकाना या शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाना
विमान के उपकरणों के साथ छेड़छाड़
ऐसे मामलों में यात्री को फ्लाइट से उतारा जा सकता है और उस पर जुर्माना या यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

बढ़ती घटनाओं के बाद लिया गया फैसला
पिछले कुछ वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों द्वारा अनुशासनहीनता की घटनाएं बढ़ी हैं। कभी शराब के नशे में विवाद, तो कभी सीट को लेकर झगड़े—इन घटनाओं ने न सिर्फ एयरलाइंस की छवि को प्रभावित किया, बल्कि अन्य यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरे में डाला।
इन परिस्थितियों को देखते हुए Directorate General of Civil Aviation ने सख्त नीति अपनाने का फैसला किया है। इससे पहले भी ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ का प्रावधान था, लेकिन अब नियमों को और स्पष्ट और कड़ा बनाया जा रहा है।

कैसे होगी कार्रवाई?
DGCA के प्रस्तावित नियमों के अनुसार—
एयरलाइंस की आंतरिक कमेटी 30 दिनों के भीतर मामले की जांच करेगी।
दोषी पाए जाने पर यात्री को 3 महीने से लेकर 2 साल या उससे अधिक समय तक यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है।गंभीर मामलों में आपराधिक मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।इसके अलावा, एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

एयरलाइंस को क्या निर्देश?
DGCA ने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे अपने क्रू मेंबर्स को ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दें। साथ ही, फ्लाइट में सीसीटीवी निगरानी, अलर्ट सिस्टम और इमरजेंसी प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जाएगा।
एयरलाइंस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों को बोर्डिंग से पहले नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि वे किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता से बचें।

यात्रियों के लिए क्या संदेश?
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का साफ संदेश है—हवाई यात्रा में अनुशासन अनिवार्य है। विमान में मौजूद हर व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या आक्रामक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से न सिर्फ फ्लाइट में सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों के बीच जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।

कानूनी पहलू भी अहम
हवाई यात्रा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संचालित होती है। ऐसे में विमान के भीतर किया गया अपराध गंभीर श्रेणी में आता है। यदि कोई यात्री पायलट के निर्देशों का उल्लंघन करता है या सुरक्षा में बाधा डालता है, तो उसे आपराधिक धाराओं के तहत सजा हो सकती है।
नई नीति के तहत एयरलाइंस को रिपोर्टिंग सिस्टम को पारदर्शी और त्वरित बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि कार्रवाई में देरी न हो।
क्या बदलेगा इस फैसले से?
फ्लाइट में अनुशासन मजबूत होगा
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी
एयरलाइंस को स्पष्ट अधिकार मिलेंगे
दुर्व्यवहार करने वालों के लिए कड़ी सजा तय होगी
सरकार और DGCA का मानना है कि यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र की साख को मजबूत करेगा और वैश्विक मानकों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाएगा।

