By: Vikash Kumar (Vicky)
क्या है फूलों की होली
रंगों की होली से पहले कई मंदिरों में फूलों की होली मनाने की परंपरा है। इस उत्सव में गुलाल की जगह विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों से भगवान और भक्तों पर पुष्पवर्षा की जाती है। इसे प्रकृति और भक्ति के मिलन का उत्सव माना जाता है। फूलों की होली विशेष रूप से फाल्गुन माह में मनाई जाती है, जब वातावरण में बसंत की सुगंध और उत्साह दोनों का संचार होता है।

पौराणिक मान्यता और आध्यात्मिक अर्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूलों की होली भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी हुई है। ब्रज क्षेत्र में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि फूल प्रेम, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक हैं। इसलिए भगवान को रंगों की जगह पुष्प अर्पित करना शुद्ध भक्ति का संकेत माना जाता है।

बसंत और भक्ति का अनोखा संगम
फाल्गुन माह को ऋतुओं का राजा बसंत का समय कहा जाता है। इस दौरान प्रकृति स्वयं रंग-बिरंगे फूलों से सजी होती है। ऐसे में मंदिरों में फूलों की होली मनाना प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है। यह परंपरा बताती है कि उत्सव केवल बाहरी रंगों का नहीं, बल्कि आंतरिक आनंद और प्रेम का भी प्रतीक है।

मंदिरों में विशेष आयोजन
देश के कई प्रमुख मंदिरों में फूलों की होली धूमधाम से मनाई जाती है। खासकर ब्रज क्षेत्र में भजन-कीर्तन के बीच भगवान पर गुलाब, गेंदा और अन्य सुगंधित फूलों की वर्षा की जाती है। भक्त इसे दिव्य अनुभव मानते हैं। वातावरण में फूलों की खुशबू और भक्ति संगीत एक अलौकिक माहौल तैयार करते हैं।

पर्यावरण के प्रति संदेश
फूलों की होली को पर्यावरण के अनुकूल उत्सव के रूप में भी देखा जा रहा है। रासायनिक रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए कई लोग अब प्राकृतिक और पारंपरिक तरीकों को अपनाने लगे हैं। यह परंपरा हमें प्रकृति से जुड़ने और उसे संरक्षित रखने का संदेश देती है।

आधुनिक समय में बढ़ती लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में फूलों की होली की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी सुंदर झलकियां देश-विदेश तक पहुंच रही हैं। कई धार्मिक संस्थाएं और मंदिर इस उत्सव को सांस्कृतिक विरासत के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
फूलों की होली केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा रंग बाहरी नहीं, बल्कि मन की भावनाओं में बसता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न स्थानों पर रीति-रिवाजों में भिन्नता संभव है।

