By;vikash kumar (vicky)
1 मार्च 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जा रहा है। आज त्रयोदशी तिथि पर रवि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। जब यह व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर तांडव नृत्य करते हैं और सभी देवता उनके गुणों का कीर्तन करते हैं। जो भक्त इस समय सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

आज का सूर्योदय सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 06 बजकर 11 मिनट पर। चन्द्रोदय शाम 04 बजकर 06 मिनट पर होगा। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय माना जाता है, इसलिए शाम के समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा।
प्रदोष व्रत का महत्व अत्यधिक है। यह व्रत न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रवि प्रदोष व्रत में सूर्य देव और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन अर्घ्य देकर सूर्य की उपासना भी लाभकारी रहती है। इससे आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। अविवाहित लोगों के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। साथ ही संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत फलदायी माना गया है।

आज के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत का पालन करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें या फलाहार करें। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान शिव का ध्यान करें।
यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। क्षेत्र और परंपरा के अनुसार तिथि एवं पूजा विधि में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
