By: Vikash Kumar (Vicky)
Today Panchang, 11 March 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा या मांगलिक कार्यक्रम से पहले पंचांग देखकर ही सही समय का चयन किया जाता है। पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय जानकारियां शामिल होती हैं, जो व्यक्ति को दिनभर के शुभ-अशुभ समय के बारे में बताती हैं।

आज 11 मार्च 2026, बुधवार का दिन है और यह दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के रूप में मनाया जा रहा है। इस तिथि को विशेष रूप से शीतला अष्टमी के रूप में जाना जाता है। शीतला अष्टमी का पर्व मां शीतला को समर्पित होता है और इस दिन भक्तजन माता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से परिवार को रोगों और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है तथा घर में सुख-शांति बनी रहती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इसलिए इस पर्व को कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है। इस दिन भक्तजन एक दिन पहले बना हुआ भोजन माता को अर्पित करते हैं और उसी प्रसाद को ग्रहण करते हैं। ऐसा करने से माता की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस समय के दौरान मां शीतला की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। भक्तजन इस दौरान माता को हल्दी, रोली, फूल और बासी भोजन का भोग अर्पित करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

आज का पंचांग – 11 मार्च 2026
वार: बुधवार
मास: चैत्र मास
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: अष्टमी (शीतला अष्टमी)
सूर्योदय: सुबह 06:36 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:27 बजे
नक्षत्र: ज्योतिषीय गणना के अनुसार दिनभर प्रभावी

शुभ मुहूर्त: सुबह 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक
हिंदू धर्म में पंचांग का अध्ययन जीवन को व्यवस्थित करने में सहायक माना जाता है। पंचांग के माध्यम से व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय का चयन कर सकता है। विशेष रूप से धार्मिक पर्वों और व्रत-त्योहारों के दौरान पंचांग की जानकारी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

आज शीतला अष्टमी का पावन पर्व होने के कारण देश के कई हिस्सों में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तजन माता शीतला से परिवार के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। इस दिन दान-पुण्य और सेवा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य को करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

