By:vikash kumar (vicky)

Kharmas 2026 Date: हिंदू धर्म में ग्रहों की चाल और सूर्य के राशि परिवर्तन का विशेष महत्व माना जाता है। जब सूर्य किसी राशि में प्रवेश करता है तो उसका प्रभाव धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में मार्च महीने में एक बार फिर खरमास की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है तो खरमास का आरंभ माना जाता है।

इस साल मार्च में सूर्य के मीन राशि में गोचर के साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। इसलिए इस समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचा जाता है। हालांकि इस अवधि में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है।

खरमास 2026 कब से शुरू होगा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य 14 मार्च 2026 की मध्य रात्रि 1 बजकर 1 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि यह गोचर मध्य रात्रि में हो रहा है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से खरमास की शुरुआत 15 मार्च 2026 से मानी जाएगी।

खरमास की यह अवधि लगभग एक महीने तक रहती है। इसका समापन तब होता है जब सूर्य अगली राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार 14 अप्रैल 2026 को सूर्य मेष राशि में गोचर करेंगे। सूर्य सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, उसी समय खरमास का समापन माना जाएगा।
खरमास का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में खरमास को आध्यात्मिक साधना और भगवान की भक्ति के लिए विशेष समय माना जाता है। हालांकि इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा रही है, लेकिन पूजा-पाठ, व्रत, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है।

मान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु की पूजा, मंदिर दर्शन और गरीबों को दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कई लोग इस दौरान धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताते हैं।
खरमास में क्या करना चाहिए
खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।
इस अवधि में दान-पुण्य, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करना लाभकारी माना जाता है।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है।

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए
खरमास के दौरान विवाह, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या नई संपत्ति खरीदना टालना चाहिए।
इस समय बड़े शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
हालांकि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह समय मुख्य रूप से धार्मिक दृष्टि से सावधानी रखने का होता है।
क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य
धार्मिक मान्यता के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में होते हैं, तब उनका प्रभाव कमजोर माना जाता है। इसी कारण इस अवधि में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करना उचित नहीं माना जाता। इस समय को आत्मचिंतन, भक्ति और साधना के लिए उपयुक्त माना गया है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार इसमें भिन्नता संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना उचित होता है।
