By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ रविवार से नहाए-खाए के साथ विधिवत शुरू हो गया है। धर्म और अध्यात्म की नगरी देवघर में इस पावन पर्व को हर साल अत्यंत श्रद्धा, शुद्धता और उत्साह के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा को सूर्य उपासना का सबसे पवित्र और अनुशासित पर्व माना जाता है, जिसमें व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए चार दिनों तक भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं।

रविवार को नहाए-खाए के दिन छठ व्रतियों ने सुबह स्नान कर अपने घरों की शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए पूजा की शुरुआत की। इस दिन कद्दू-भात का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार छठ व्रती के घर में कद्दू का प्रसाद बनाया जाता है, जिसे पूरी तरह सात्विक तरीके से तैयार किया जाता है। इस प्रसाद को पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर व्रती इसे ग्रहण करती हैं।

देवघर के बाजारों में भी नहाए-खाए के दिन खासा रौनक देखने को मिला। शहर के विभिन्न बाजारों में कद्दू की खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान कद्दू की कीमत ₹10 से ₹30 प्रति किलो तक रही। दुकानदारों के अनुसार छठ पूजा के दौरान कद्दू की मांग काफी बढ़ जाती है, क्योंकि यह सुपाच्य और सात्विक भोजन माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कद्दू शरीर को शुद्ध और पवित्र बनाए रखने में सहायक होता है, इसलिए छठ व्रती इसे विशेष रूप से ग्रहण करती हैं।

नहाए-खाए के बाद दूसरे दिन यानी सोमवार को खरना का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन छठ व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर भगवान को भोग लगाती हैं। इसके बाद व्रती और श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना के साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है, जो छठ पूजा का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण चरण होता है।
देवघर में छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह देखा जा रहा है। शहर के विभिन्न छठ घाटों की साफ-सफाई युद्ध स्तर पर की जा रही है। प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर घाटों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में जुटे हैं, ताकि व्रती बिना किसी परेशानी के पूजा-अर्चना कर सकें। नदी और तालाबों के किनारे विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है, साथ ही प्रकाश और सुरक्षा की भी व्यवस्था की जा रही है।

छठ पूजा के दौरान शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी कारण बाजारों में भी दुकानदारों ने अपनी दुकानों को लहसुन और प्याज जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से दूर रखा है। फल, सब्जी और अन्य पूजन सामग्री बेचने वाले दुकानदार पूरी तरह सात्विक वातावरण बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि व्रतियों के नियमों का पालन सही तरीके से हो सके।

धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जो जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतति की कामना को पूरा करती हैं। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिकता का भी संदेश देता है। इस दौरान लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और पूरे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

देवघर में हर साल की तरह इस बार भी छठ पर्व को लेकर खास तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस महापर्व को मनाने में जुटे हैं। नहाए-खाए के साथ शुरू हुआ यह पर्व आने वाले दिनों में और अधिक भव्य रूप लेगा, जब घाटों पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ पूजा का यह महापर्व देवघर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और भी मजबूत करता है। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि अनुशासन, त्याग और समर्पण की भी अनूठी मिसाल पेश करता है।

