By: Vikash Mala Mandal
देश में बढ़ती गैस की कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब उपभोक्ता पारंपरिक रसोई गैस यानी LPG से हटकर पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने जानकारी दी कि अब तक करीब 6,000 उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से अपना LPG कनेक्शन छोड़ दिया है और PNG को अपनाया है।

सरकार इस बदलाव को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि PNG न केवल सुरक्षित है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए किफायती और सुविधाजनक विकल्प भी बनता जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, वहां लोग LPG सिलेंडर की झंझट से बचने के लिए PNG को प्राथमिकता दे रहे हैं।

नीरज मित्तल ने बताया कि PNG कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह न केवल ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत को बढ़ावा देता है, बल्कि गैस सिलेंडर की डिलीवरी और स्टोरेज से जुड़ी समस्याओं को भी खत्म करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश के अधिक से अधिक शहरों में PNG नेटवर्क का विस्तार करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित गैस सुविधा मिल सके।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ क्षेत्रों में सप्लाई की समस्या ने उपभोक्ताओं को विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। ऐसे में PNG एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। इसमें गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घर तक पहुंचती है, जिससे सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग की चिंता नहीं रहती।

सरकार ने इस बदलाव को देखते हुए कई राहत भरे कदम भी उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार, PNG कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है और इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। इसके अलावा, शुरुआती कनेक्शन शुल्क में भी कई जगहों पर छूट दी जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि PNG का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। यह LPG की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है। इसी कारण सरकार भी स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए PNG के विस्तार पर जोर दे रही है।
हालांकि, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अभी भी PNG नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। वहां के लोगों के लिए LPG ही मुख्य विकल्प बना हुआ है। लेकिन सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और गांवों तक भी पाइप गैस की सुविधा पहुंचाई जाए।

उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को देखते हुए गैस कंपनियां भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं। वे अब PNG कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विशेष ऑफर और सुविधाएं दे रही हैं। इसके साथ ही, ग्राहक सेवा को भी बेहतर बनाया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
सरकार का मानना है कि अगर इसी तरह PNG की मांग बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह रसोई गैस का मुख्य स्रोत बन सकता है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, LPG से PNG की ओर बढ़ता रुझान एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह न केवल उपभोक्ताओं की जरूरतों और प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है, बल्कि देश के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे सुधारों को भी उजागर करता है।

