By: Vikash Mala Mandal
हनुमान जयंती का महत्व
हनुमान जयंती का पर्व भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें सिंदूर अर्पित करने की परंपरा निभाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा क्यों शुरू हुई और इसका क्या धार्मिक महत्व है? इसके पीछे एक बेहद भावुक और पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो प्रभु श्री राम के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति को दर्शाती है।

माता सीता और सिंदूर की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता सीता अपनी मांग में सिंदूर भर रही थीं। उस समय वहां भगवान हनुमान भी उपस्थित थे। उन्होंने बड़ी जिज्ञासा से माता सीता से पूछा कि आप यह सिंदूर क्यों लगा रही हैं। इस पर माता सीता ने मुस्कुराते हुए बताया कि सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है और यह उनके सुहाग की रक्षा का प्रतीक है। इसलिए वह प्रभु श्री राम की दीर्घायु और कुशल मंगल के लिए सिंदूर लगाती हैं।

हनुमान जी की अटूट भक्ति
हनुमान जी प्रभु राम के परम भक्त थे और उनकी भक्ति में पूरी तरह समर्पित थे। जैसे ही उन्हें यह बात पता चली कि सिंदूर लगाने से भगवान राम की आयु बढ़ती है, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। उनका उद्देश्य केवल एक था कि प्रभु श्री राम की आयु लंबी हो और वे सदा स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

भगवान राम की प्रतिक्रिया
जब भगवान राम ने हनुमान जी को पूरे शरीर पर सिंदूर लगाए देखा तो उन्होंने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि आपने ऐसा क्यों किया। इस पर हनुमान जी ने अत्यंत विनम्रता से उत्तर दिया कि माता सीता ने आपकी लंबी आयु के लिए अपनी मांग में सिंदूर लगाया है, इसलिए मैंने सोचा कि यदि मैं पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं तो आपकी आयु और भी अधिक बढ़ेगी। हनुमान जी की इस निस्वार्थ भक्ति को देखकर भगवान राम अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया।

सिंदूर चढ़ाने की परंपरा का कारण
यही कारण है कि आज भी हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उस पर प्रभु श्री राम की भी कृपा बनी रहती है।

हनुमान जी को क्या चढ़ाएं
हनुमान जयंती के दिन भक्त विशेष रूप से हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चना अर्पित करते हैं। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक लाभ और मान्यताएं
धार्मिक मान्यता है कि बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाने से शनि दोष, भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास का संचार होता है। इसलिए हनुमान जयंती के दिन यह विशेष पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों और परंपराओं के अनुसार मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले संबंधित विशेषज्ञ या पंडित की सलाह अवश्य लें।


