By: Vikash, Mala Mandal
आज रविवार, 5 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। यह दिन भगवान गणेश के विकट स्वरूप की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति व आत्मबल की प्राप्ति होती है।

संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के ‘विकट’ स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री गणेश का यह रूप विशेष रूप से भक्तों को भय, रोग और जीवन की बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
मुद्गल पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने कामासुर नामक दैत्य के अहंकार को समाप्त करने के लिए विकट रूप धारण किया था। इस स्वरूप में वे मयूर पर सवार होते हैं, इसलिए उन्हें ‘मयूरेश’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आज की तिथि और नक्षत्र
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि आज दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा। चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व संकष्टी व्रत के कारण और भी बढ़ जाता है।
आज वज्र योग दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक रहेगा, जो कुछ कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता, इसलिए इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए।

करण और योग का समय
विष्टि करण आज दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसे भद्रा भी कहा जाता है और इस दौरान शुभ कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है। इसके बाद बव करण शुरू होगा, जो 6 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। बव करण में किए गए कार्य सामान्य रूप से शुभ फल प्रदान करते हैं।

राहुकाल और शुभ मुहूर्त
रविवार के दिन राहुकाल का समय शाम के समय माना जाता है। आज राहुकाल लगभग शाम 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ समय का चयन करके आप अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। सुबह का समय पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। दिन का कुल समय लगभग 12 घंटे 34 मिनट का रहेगा, जो सामान्य गतिविधियों के लिए अनुकूल है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान कर भगवान गणेश की विधिवत पूजा करनी चाहिए। दिनभर व्रत रखकर शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलना चाहिए। गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

आज का दिन धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद खास है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर और भगवान गणेश के विकट स्वरूप की पूजा करके आप अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।
यह पंचांग और धार्मिक जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। समय और तिथि में स्थान अनुसार अंतर संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य से पहले अपने स्थानीय पंडित या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

