By: Mala Mandal
देवघर। नगर निगम परिसर में सोमवार को वार्ड पार्षदों ने शहर की ज्वलंत समस्याओं को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्षदों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (MSWM) के तहत काम कर रही एजेंसी पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई। पार्षदों का कहना है कि एजेंसी द्वारा कचरा उठाव और सफाई व्यवस्था में लगातार लापरवाही बरती जा रही है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

धरना स्थल पर मौजूद पार्षदों ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में समय पर कचरा उठाव नहीं हो रहा है। सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर सरकार और प्रशासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

पार्षदों ने आरोप लगाया कि MSWM एजेंसी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रही है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में अब एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट करना ही एकमात्र विकल्प बचा है। पार्षदों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो शहर की स्थिति और भी बदतर हो सकती है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पेयजल आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पार्षदों ने कहा कि शहर के कई इलाकों में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। कहीं-कहीं तो लोगों को कई दिनों तक पानी के लिए तरसना पड़ता है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

पार्षदों ने बताया कि कई वार्डों में पाइपलाइन की स्थिति जर्जर है और लीकेज की समस्या बनी हुई है। इसके कारण न केवल पानी की बर्बादी हो रही है बल्कि कई स्थानों पर दूषित पानी की आपूर्ति भी हो रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और खराब पाइपलाइनों की मरम्मत कराई जाए।
धरना दे रहे जनप्रतिनिधियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

मौके पर मौजूद उपमहापौर ने भी पार्षदों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सभी पार्षद जनता के बीच से चुनकर आए हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली के कारण पार्षदों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

उपमहापौर ने कहा कि पार्षद लगातार अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क करते हैं, लेकिन कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती। इससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि पार्षदों की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लिया जाए और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

धरना के दौरान पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि शहर की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम प्रशासन और एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करें, तो शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

इस धरना-प्रदर्शन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम प्रशासन पार्षदों की मांगों पर क्या कदम उठाता है। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
देवघर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन शहर में स्वच्छता और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का बेहतर होना अत्यंत आवश्यक है। श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजनों को देखते हुए भी यह जरूरी हो जाता है कि शहर की व्यवस्था दुरुस्त रहे। ऐसे में पार्षदों का यह आंदोलन कहीं न कहीं प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

