By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य के पहले गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। लंबे समय से द्रविड़ राजनीति के प्रभाव वाले तमिलनाडु में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए जनता का भरोसा जीत लिया।

चेन्नई में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में हजारों समर्थक मौजूद रहे। समारोह में फिल्म जगत, उद्योग जगत और राजनीति से जुड़े कई बड़े चेहरे शामिल हुए। विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कहा कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी प्रशासन, रोजगार, शिक्षा और युवाओं के भविष्य को मजबूत करना होगा।

तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि राज्य में दशकों से DMK और AIADMK जैसी द्रविड़ पार्टियों का दबदबा रहा है। ऐसे में विजय का सत्ता तक पहुंचना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया था, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला।

नई सरकार के गठन के साथ ही विजय की कैबिनेट को लेकर भी लोगों में उत्सुकता बनी हुई थी। मुख्यमंत्री विजय ने अनुभव और युवा नेतृत्व के संतुलन के साथ अपनी टीम तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, उद्योग, ग्रामीण विकास और आईटी जैसे विभागों के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कैबिनेट में शामिल प्रमुख चेहरों में वरिष्ठ नेता आर. राजशेखर को वित्त मंत्रालय दिया गया है। वहीं युवा नेता कार्तिकेयन को आईटी और डिजिटल विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली है। महिला नेता प्रिया रमेश को स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया है। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग के लिए एस. मणिकंदन और शिक्षा मंत्रालय के लिए एलंगोवन को जिम्मेदारी दी गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय ने अपनी कैबिनेट में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। युवा चेहरों को मौका देकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी सरकार नई सोच और नई ऊर्जा के साथ काम करेगी। विजय की पार्टी ने चुनाव के दौरान युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

शपथ ग्रहण के बाद विजय ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए हर वादे को पूरा करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को शिक्षा, टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही उन्होंने किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नई योजनाएं लाने का भी संकेत दिया।

विजय की जीत को दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आने वाले नेताओं की तमिलनाडु में लंबी परंपरा रही है। इससे पहले एमजी रामचंद्रन और जयललिता जैसे सितारे भी मुख्यमंत्री बन चुके हैं। हालांकि विजय की राजनीति को अलग माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने युवाओं और सोशल मीडिया के जरिए बड़ी जनसंपर्क रणनीति बनाई।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार विजय की सबसे बड़ी चुनौती अब चुनावी वादों को जमीन पर उतारना होगी। राज्य में बेरोजगारी, जल संकट, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे जैसे कई बड़े मुद्दे मौजूद हैं। विपक्ष भी विजय सरकार पर लगातार नजर बनाए हुए है। DMK और AIADMK दोनों ने कहा है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने का काम करेंगे।
सोशल मीडिया पर भी विजय के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेजी से हो रही है। उनके समर्थक इसे “नए तमिलनाडु की शुरुआत” बता रहे हैं। वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे दक्षिण भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मान रहे हैं।

अब सभी की नजर विजय सरकार के पहले 100 दिनों पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं और निवेश बढ़ाने से जुड़े कई बड़े फैसले ले सकती है। जनता को उम्मीद है कि विजय अपनी लोकप्रियता को बेहतर प्रशासन में बदलने में सफल होंगे।
तमिलनाडु की राजनीति में आया यह बदलाव आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। विजय की राजनीतिक यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है और पूरे देश की निगाहें उनकी सरकार के कामकाज पर टिकी हुई हैं।

