By: Mala Mandal
आज के समय में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल हो चुका है। खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने की वजह से कई बार बीमारी गंभीर स्थिति तक पहुंच जाती है। हालांकि आधुनिक मेडिकल तकनीकों ने अब इसके इलाज को पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पेशाब करने में कठिनाई और दर्द की शिकायत के बाद 71 वर्षीय पुरुष मरीज में स्टेज 2 प्रोस्टेट कैंसर का पता चला। मरीज का इलाज अस्पताल के मूत्रविज्ञान विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया। डॉक्टरों ने रोबोटिक एंडोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक पूर्ण प्रोस्टेटेक्टॉमी सर्जरी की, जिसके बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार रोबोटिक तकनीक की मदद से सर्जरी अधिक सटीक तरीके से की जा सकी, जिससे मरीज को कम दर्द, कम ब्लीडिंग और तेजी से रिकवरी का लाभ मिला।
क्या था मरीज की परेशानी?
जानकारी के अनुसार 71 वर्षीय मरीज को लंबे समय से पेशाब करने में कठिनाई हो रही थी। पेशाब के दौरान दर्द, बार-बार यूरिन आने की समस्या और पेशाब का ठीक से न होना जैसे लक्षण लगातार बढ़ रहे थे। शुरुआत में मरीज ने इसे सामान्य उम्र संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब परेशानी ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया।
मूत्रविज्ञान विभाग में जांच के दौरान डॉक्टरों ने मरीज के कई जरूरी टेस्ट किए। जांच रिपोर्ट और बायोप्सी के बाद यह पुष्टि हुई कि मरीज स्टेज 2 प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित है।

क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर?
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक सामान्य लेकिन गंभीर कैंसर है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है, जो पुरुष प्रजनन तंत्र का हिस्सा है। जब इस ग्रंथि की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब प्रोस्टेट कैंसर विकसित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकती है।
प्रोस्टेट कैंसर के सामान्य लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार पेशाब से जुड़ी कुछ समस्याएं प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकती हैं। इनमें पेशाब करने में दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेशाब का धीमा फ्लो, पेशाब रुक-रुक कर आना, रात में बार-बार यूरिन जाना और पेशाब में खून आना जैसे लक्षण शामिल हैं।
हालांकि ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए ऐसी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी माना जाता है।

कैसे हुई रोबोटिक प्रोस्टेटेक्टॉमी?
मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने रोबोटिक एंडोस्कोपी तकनीक से पूर्ण प्रोस्टेटेक्टॉमी करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम की मदद से प्रोस्टेट ग्रंथि को बेहद सटीक तरीके से हटाया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। इसमें छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे शरीर को कम नुकसान पहुंचता है और मरीज जल्दी रिकवर करता है।
रोबोटिक सर्जरी के फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार रोबोटिक तकनीक ने कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। इस तकनीक से सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को बेहतर विजुअल और ज्यादा कंट्रोल मिलता है। इससे सर्जरी की सटीकता बढ़ जाती है।
रोबोटिक प्रोस्टेटेक्टॉमी के दौरान ब्लीडिंग कम होती है, संक्रमण का खतरा घटता है और मरीज को अस्पताल में कम समय तक रहना पड़ता है। इसके अलावा रिकवरी भी पारंपरिक सर्जरी की तुलना में तेज होती है।

समय पर जांच क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती उम्र के पुरुषों को प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को नियमित हेल्थ चेकअप और प्रोस्टेट जांच कराने की सलाह दी जाती है।
अगर शुरुआती स्टेज में प्रोस्टेट कैंसर का पता चल जाए, तो इसका इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है। समय पर निदान और आधुनिक तकनीक की मदद से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

बुजुर्गों में तेजी से बढ़ रहा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, उम्र और पारिवारिक इतिहास प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। भारत समेत दुनियाभर में बुजुर्ग पुरुषों में इसके मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
हालांकि जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण अब इस बीमारी के इलाज की सफलता दर पहले की तुलना में बेहतर हो गई है।

डॉक्टरों ने क्या दी सलाह?
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि पेशाब से जुड़ी किसी भी समस्या को हल्के में न लें। अगर लंबे समय तक दर्द, जलन, बार-बार पेशाब या यूरिन से जुड़ी परेशानी बनी रहती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी बीमारी या लक्षण की स्थिति में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। स्वयं इलाज करने की कोशिश न करें।

