By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
भारतीय सिनेमा में अपनी शानदार अदाकारी और दमदार किरदारों से अलग पहचान बनाने वाले Nawazuddin Siddiqui आज करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड में कदम रखने से पहले नवाजुद्दीन एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी करते थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर मुंबई की चमक-दमक तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुधाना कस्बे में हुआ था। साधारण परिवार में जन्मे नवाजुद्दीन बचपन से ही कुछ अलग करना चाहते थे। उन्होंने हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें गुजरात के वडोदरा में एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी मिली। नौकरी अच्छी थी, लेकिन उनका मन अभिनय की दुनिया में बसता था।

कहा जाता है कि दिल्ली में एक नाटक देखने के बाद उनके अंदर एक्टिंग का जुनून और बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली पहुंच गए। यहां उन्होंने थिएटर से जुड़कर अभिनय सीखना शुरू किया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी एनएसडी में दाखिला पाने के लिए उन्होंने कई नाटकों में हिस्सा लिया। अभिनय के प्रति उनकी दीवानगी इतनी थी कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा।

दिल्ली से मुंबई पहुंचने के बाद उनका संघर्ष और भी कठिन हो गया। शुरुआती दिनों में उन्हें फिल्मों में छोटे-छोटे रोल मिले। कई बार तो उनके किरदार इतने छोटे होते थे कि दर्शक उन्हें पहचान भी नहीं पाते थे। गुजारा चलाने के लिए उन्होंने चौकीदार की नौकरी तक की। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे और वे पारले-जी बिस्किट खाकर दिन बिताते थे।

हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में नवाजुद्दीन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि लगभग 10 वर्षों तक उन्हें खुद पर भरोसा डगमगाता हुआ महसूस हुआ। लगातार रिजेक्शन मिलने के कारण कई बार उन्हें लगा कि शायद वे अभिनय के लिए बने ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कई बार फिल्मों में काम मिलने के बाद अंतिम समय में उन्हें बाहर कर दिया जाता था, जिससे वे अंदर से टूट जाते थे।

हालांकि, नवाजुद्दीन ने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत का परिणाम तब सामने आया जब उन्हें फिल्म “ब्लैक फ्राइडे” में मौका मिला। इसके बाद Gangs of Wasseypur ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। यहीं से नवाजुद्दीन सिद्दीकी बॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं की सूची में शामिल हो गए।
इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया। The Lunchbox, Bajrangi Bhaijaan, Raees, Manto और Sacred Games जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में उनकी अदाकारी को खूब सराहा गया। नवाजुद्दीन ने यह साबित कर दिया कि बॉलीवुड में सफल होने के लिए सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि प्रतिभा और मेहनत भी जरूरी है।

आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी को हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में गिना जाता है। उनकी अभिनय शैली बिल्कुल अलग मानी जाती है। वे अपने किरदार में पूरी तरह ढल जाने के लिए जाने जाते हैं। चाहे गंभीर भूमिका हो या कॉमिक किरदार, नवाजुद्दीन हर भूमिका में जान डाल देते हैं। यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
नवाजुद्दीन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर जुनून और मेहनत करने का हौसला हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। पेट्रोकेमिकल कंपनी के एक साधारण केमिस्ट से बॉलीवुड स्टार बनने तक का उनका सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और धैर्य की अनोखी मिसाल है।

