By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों ने ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह जलवायु स्थिति तेजी से मजबूत होती है तो भारत समेत कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा, अनियमित बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल सकती हैं। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह स्थिति साल 1877 में आए विनाशकारी अल नीनो से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून, कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो प्रशांत महासागर के सतही पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। जब यह स्थिति सामान्य से अधिक ताकतवर हो जाती है तो उसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है। इसका प्रभाव केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करता है। भारत जैसे मानसून आधारित देश में इसका असर सबसे अधिक देखा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुपर अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की लगभग 70 प्रतिशत बारिश के लिए जिम्मेदार होता है और कृषि क्षेत्र इसी पर निर्भर करता है। मानसून कमजोर होने से खेती प्रभावित होगी, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इससे महंगाई बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में इस साल तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक रह सकता है। कई राज्यों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बनने का खतरा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली समेत कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। बढ़ती गर्मी का असर बिजली की मांग, जल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में कम बारिश होगी तो कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। इससे शहरी इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। हिमालयी राज्यों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर अल नीनो का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालेगा। कृषि उत्पादन कम होने से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। महंगाई बढ़ने से आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। वहीं बिजली उत्पादन और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने से उद्योगों को भी नुकसान हो सकता है।

भारत सरकार और मौसम विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है। जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत होगी ताकि संभावित संकट का असर कम किया जा सके। किसानों को भी मौसम के बदलते पैटर्न के अनुसार फसल चयन और खेती के तरीके अपनाने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों ने लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। भीषण गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीने, दोपहर के समय धूप से बचने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। वहीं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में प्रशासन को पहले से तैयारी करने को कहा गया है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की चरम घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सुपर अल नीनो जैसी परिस्थितियां भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी हो गया है।
मौसम विभाग आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति और अल नीनो के प्रभाव को लेकर लगातार अपडेट जारी करेगा। फिलहाल विशेषज्ञों की चेतावनी ने सरकार, किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यदि सुपर अल नीनो की स्थिति मजबूत होती है तो भारत को भीषण गर्मी, सूखे और बाढ़ जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

