By: Mala Mandal
झारखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरी देवघर में आगामी श्रावणी मेले को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के सौंदर्यकरण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रशासन ने नंदन पहाड़ और डिग्रिया पहाड़ के व्यापक विकास की कार्ययोजना तैयार की है। श्रावणी मेले से पहले इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिला प्रशासन की प्राथमिकता केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि देवघर को राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि धार्मिक स्थलों के साथ-साथ प्राकृतिक और पौराणिक महत्व वाले स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, तो इससे जिले की आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।
धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है नंदन पहाड़
देवघर स्थित नंदन पहाड़ धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ के वाहन नंदी महाराज का निवास स्थान इसी क्षेत्र में था। पौराणिक कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि नंदी महाराज और रावण के बीच युद्ध इसी स्थान पर हुआ था। यही कारण है कि यहां स्थापित नंदी महाराज की प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल परिवारों, युवाओं और धार्मिक पर्यटकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। यहां से पूरे शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जिससे पर्यटक यहां समय बिताना पसंद करते हैं।

देशभर से पहुंचते हैं पर्यटक
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अधिकांश श्रद्धालु नंदन पहाड़ घूमने जरूर पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश से देवघर पहुंचे एक पर्यटक ने बताया कि उन्होंने नंदन पहाड़ के प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्व के बारे में काफी सुना था। इसी वजह से वे पूरे परिवार के साथ यहां घूमने आए हैं। उनका कहना था कि यहां का वातावरण बेहद शांत और आकर्षक है, लेकिन यदि यहां और बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं तो यह स्थल देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन भी अब इस स्थल को आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है।

स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नंदन पहाड़ का व्यवस्थित विकास किया जाए तो इससे पर्यटन उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय व्यवसायों को भी फायदा होगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि यहां साफ-सफाई, पार्किंग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जाए ताकि पर्यटकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासन ने बनाई व्यापक विकास योजना
जिले के खेल एवं सांस्कृतिक पदाधिकारी संतोष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि नंदन पहाड़ को बी-ग्रेड पर्यटन स्थल की श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ रुपये तक विकास कार्यों पर खर्च किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन की योजना के तहत यहां सड़क, सुरक्षा बैरिकेडिंग, व्यू प्वाइंट, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और पर्यटकों की सुविधा से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। पर्यटन विभाग के सचिव स्तर से भी योजना को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे जल्द कार्य शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस
पिछले वर्ष हुई दुर्घटना को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। प्रशासन की ओर से खतरनाक और खाली हिस्सों को भरने, सुरक्षा रेलिंग लगाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की तैनाती की भी योजना बनाई गई है। प्रशासन का मानना है कि श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

देवघर को पर्यटन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नंदन पहाड़ और डिग्रिया पहाड़ का विकास आधुनिक पर्यटन मानकों के अनुरूप किया जाता है, तो देवघर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे राज्य के पर्यटन राजस्व में वृद्धि होगी और स्थानीय लोगों की आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
जिला प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में देवघर को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

