By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होते ही लाखों टैक्सपेयर्स जल्दी रिटर्न भरने की तैयारी में जुट जाते हैं। कई लोग जल्द रिफंड पाने के लिए मई या जून की शुरुआत में ही ITR फाइल कर देते हैं। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 जून से पहले इनकम टैक्स रिटर्न भरना कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है। जल्दबाजी में दाखिल किया गया रिटर्न बाद में नोटिस, गलत टैक्स कैलकुलेशन या रिफंड में देरी जैसी समस्याएं खड़ी कर सकता है।

दरअसल, हर साल कंपनियां, बैंक, म्यूचुअल फंड और दूसरी वित्तीय संस्थाएं टैक्स से जुड़ी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भेजती हैं। इसके बाद टैक्सपेयर्स के फॉर्म 26AS और AIS यानी Annual Information Statement अपडेट होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह प्रक्रिया जून के दूसरे सप्ताह तक लगातार चलती रहती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति 15 जून से पहले ITR भर देता है तो उसकी कई वित्तीय जानकारियां सिस्टम में अपडेट नहीं हो पातीं।
फॉर्म 26AS और AIS का अपडेट होना क्यों जरूरी?
ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 26AS और AIS का मिलान करना बेहद जरूरी माना जाता है। इन दस्तावेजों में टैक्स कटौती, बैंक ब्याज, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन, फिक्स्ड डिपॉजिट और दूसरी आय से जुड़ी जानकारियां दर्ज होती हैं।अगर किसी टैक्सपेयर ने जल्दी ITR फाइल कर दिया और बाद में AIS में नई एंट्री जुड़ गई, तो इनकम टैक्स विभाग इसे आय छिपाने या गलत जानकारी देने के रूप में देख सकता है। ऐसी स्थिति में नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।

जल्दबाजी में रिफंड अटकने का भी खतरा
कई लोग जल्दी ITR इसलिए फाइल करते हैं ताकि उन्हें जल्द टैक्स रिफंड मिल सके। लेकिन अधूरी जानकारी के साथ भरा गया रिटर्न प्रोसेसिंग के दौरान अटक सकता है। इससे रिफंड में देरी हो सकती है या फिर गलत रिफंड जारी होने की आशंका रहती है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बाद में डेटा मिसमैच सामने आता है तो टैक्सपेयर को Revised Return दाखिल करना पड़ सकता है। इससे अतिरिक्त समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते हैं।

बैंक ब्याज और TDS डेटा में हो सकता है अंतर
जून के मध्य तक कई बैंक अपने ग्राहकों के ब्याज और TDS से जुड़ी जानकारी अपडेट करते हैं। अगर आपने मई या जून की शुरुआत में ITR फाइल कर दिया, तो हो सकता है कि आपके खाते का पूरा ब्याज विवरण सिस्टम में दिखाई न दे। इससे टैक्स देनदारी का सही आकलन नहीं हो पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि 15 जून के बाद ज्यादातर संस्थाओं का डेटा अपडेट हो जाता है। इसलिए इस समय के बाद ITR फाइल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
सैलरीड कर्मचारियों को भी करना चाहिए इंतजार
नौकरीपेशा लोगों के लिए Form-16 सबसे अहम दस्तावेज होता है। आमतौर पर कंपनियां जून के मध्य तक कर्मचारियों को Form-16 जारी करती हैं। इस फॉर्म में सैलरी, टैक्स कटौती और निवेश छूट की पूरी जानकारी होती है। अगर कोई कर्मचारी Form-16 मिलने से पहले ITR भर देता है तो बाद में आंकड़ों में अंतर आने की संभावना रहती है। इससे रिटर्न में सुधार करना पड़ सकता है।

गलती होने पर देना पड़ सकता है जुर्माना
इनकम टैक्स नियमों के तहत गलत जानकारी देने या आय छिपाने पर टैक्स विभाग कार्रवाई कर सकता है। कई मामलों में जुर्माना और ब्याज भी देना पड़ सकता है। हालांकि तकनीकी गलती होने पर टैक्सपेयर को Revised Return भरने का मौका मिलता है, लेकिन इससे अतिरिक्त झंझट बढ़ जाता है।
किन लोगों को जल्दी ITR फाइल करना चाहिए?
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की आय का स्रोत सीमित है और जिनका पूरा डेटा पहले से उपलब्ध है, वे जल्दी ITR फाइल कर सकते हैं। लेकिन जिन लोगों की आय कई स्रोतों से होती है, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश है, उन्हें थोड़ा इंतजार करना चाहिए।

ITR फाइल करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
– Form 26AS जरूर चेक करें
– AIS और TIS का मिलान करें
– Form-16 मिलने का इंतजार करें
– बैंक ब्याज और FD डिटेल्स जांच लें
– सभी निवेश और टैक्स छूट की जानकारी मिलाएं
– गलत जानकारी मिलने पर तुरंत सुधार करें

सरकार भी देती है सही डेटा का महत्व
इनकम टैक्स विभाग लगातार टैक्सपेयर्स को सही और अपडेटेड जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने की सलाह देता है। विभाग का कहना है कि जल्दबाजी में भरा गया ITR बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।
यही वजह है कि टैक्स एक्सपर्ट्स 15 जून के बाद ITR फाइल करने को बेहतर मानते हैं। इससे सभी जरूरी

