By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देशभर में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार फ्यूल प्राइस बढ़ाए गए हैं, जिससे महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। लगातार बढ़ रही ईंधन की कीमतों का असर अब आम आदमी की जेब से लेकर परिवहन, खेती और रोजमर्रा के सामानों तक साफ दिखाई देने लगा है।

तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। राजधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत कई शहरों में लोगों को अब पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है, जबकि आम जनता में भी नाराजगी देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी इसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की समस्याओं ने भी तेल बाजार को प्रभावित किया है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकार टैक्स कम करके आम जनता को राहत दे सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।

पिछले 10 दिनों में चौथी बार कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ने लगा है। ट्रक ऑपरेटरों और बस संचालकों का कहना है कि डीजल महंगा होने से संचालन लागत लगातार बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इसका असर किराए और मालभाड़े पर भी दिखाई दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो फल-सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
कृषि क्षेत्र में भी डीजल की बढ़ती कीमतें किसानों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। खेतों में सिंचाई, ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में डीजल का बड़ा उपयोग होता है। ऐसे में लागत बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान संगठनों ने सरकार से जल्द राहत देने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को जिम्मेदार बता रहे हैं। ट्विटर, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर फ्यूल प्राइस हाइक ट्रेंड कर रहा है।
विपक्षी दलों ने लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आम जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है। कई नेताओं ने कहा कि पहले ही खाद्य पदार्थों और गैस सिलेंडर की कीमतें लोगों को परेशान कर रही हैं, अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से स्थिति और खराब हो सकती है।

उधर सरकार की ओर से अभी तक इस ताजा बढ़ोतरी पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए तेल कंपनियां कीमतों में बदलाव कर रही हैं। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई दर पर भी पड़ेगा। रिजर्व बैंक और आर्थिक विशेषज्ञ पहले ही महंगाई को लेकर चिंता जता चुके हैं।

आम लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रही कीमतों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। नौकरीपेशा वर्ग से लेकर छोटे व्यापारियों तक सभी पर इसका असर पड़ रहा है। कई लोगों ने सरकार से एक्साइज ड्यूटी और वैट में कटौती करने की मांग की है ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 10 दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल महंगा होने को लोग कैसे देखते हैं? क्या यह केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर है या फिर सरकार की नीतियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं? लगातार बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता राहत की उम्मीद लगाए बैठी है।

