By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परीक्षा रद्द होने और दोबारा एग्जाम की अनिश्चितता के बीच कर्नाटक की 18 वर्षीय छात्रा भाग्यश्री ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर लाखों लोग परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर सरकार और एजेंसियों से सवाल पूछ रहे हैं।

दोबारा परीक्षा के तनाव में टूट गई छात्राजानकारी के मुताबिक, भाग्यश्री कर्नाटक की रहने वाली थीं और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं। परिवार ने बताया कि वह लंबे समय से NEET UG 2026 की तैयारी कर रही थीं। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद जब दोबारा परीक्षा की चर्चा शुरू हुई, तब से वह मानसिक तनाव में थीं। परिजनों के अनुसार, छात्रा लगातार इस बात को लेकर परेशान थी कि अगर परीक्षा दोबारा हुई तो उसे फिर से उसी दबाव और तैयारी के दौर से गुजरना पड़ेगा। इसी तनाव के बीच उसने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लिया।

देशभर में उठ रहे परीक्षा प्रणाली पर सवाल
NEET UG 2026 को लेकर पहले ही कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि हर साल होने वाले विवाद अब छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों यूजर्स ने परीक्षा प्रणाली को लेकर नाराजगी जताई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में बार-बार लापरवाही क्यों हो रही है।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
भाग्यश्री की मौत के बाद सोशल Media पर #NEETUG2026 और #JusticeForBhagyashree जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। कई छात्रों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए कहा कि लगातार बदलते फैसले और पेपर लीक की घटनाएं उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और स्थिरता बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा होता है। वहीं कई लोगों ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया में बड़े सुधार की मांग की है।

मानसिक दबाव में जी रहे प्रतियोगी छात्र
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र पहले से ही भारी मानसिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होना, पेपर लीक की खबरें और दोबारा एग्जाम की अनिश्चितता उनके तनाव को कई गुना बढ़ा देती है।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, परिवार और शिक्षकों को छात्रों की मानसिक स्थिति पर लगातार ध्यान देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग देना बेहद जरूरी है।सरकार और एजेंसियों पर बढ़ा दबाव

इस घटना के बाद केंद्र सरकार, NTA और संबंधित एजेंसियों पर पारदर्शी जांच और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने का दबाव बढ़ गया है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों ने कहा है कि सिर्फ जांच के भरोसे समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी जरूरी हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल
भाग्यश्री की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली छात्रों को सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल दे पा रही है। लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले विवाद उनके आत्मविश्वास को तोड़ रहे हैं।
अब सभी की नजर सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर है कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से बड़े सुधार किए जाते हैं।

