By: Mala Mandal
देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोगों को मानसून का इंतजार है, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। मौसम विभाग ने बड़ा अपडेट जारी करते हुए बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल श्रीलंका के आसपास सक्रिय कम दबाव और तूफानी हवाओं की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। मानसून पिछले कई दिनों से केरल तट से करीब 30 से 35 किलोमीटर दूर रुका हुआ है, जिससे देश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस लगातार बढ़ती जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग यानी IMD के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों तक मानसून के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना कम दिखाई दे रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है और कई राज्यों में बारिश औसत से कम होने का अनुमान है। इसके साथ ही जून और जुलाई में भी हीटवेव यानी लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।

क्यों लेट हो रहा है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार श्रीलंका और आसपास के समुद्री इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र और तेज हवाओं की वजह से मानसून की चाल प्रभावित हुई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसमीय बदलावों का असर मानसून की गति पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर मानसून मई के अंत तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसमें देरी देखने को मिल रही है। अगर अगले कुछ दिनों में मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल नहीं बनीं तो देश के कई हिस्सों में बारिश का इंतजार और लंबा हो सकता है।
जून-जुलाई में भी पड़ेगी भीषण गर्मी
IMD ने चेतावनी दी है कि मानसून की धीमी रफ्तार की वजह से उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में जून और जुलाई के दौरान भी हीटवेव का असर देखने को मिल सकता है। कई इलाकों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में लू की स्थिति दोबारा गंभीर हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार गर्म हवाओं और उमस की वजह से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इस साल कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल देश में औसत से करीब 10 प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है। हालांकि कुछ राज्यों में सामान्य बारिश होने की संभावना है, लेकिन कई क्षेत्रों में मानसून कमजोर रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश का असर खेती, जलस्तर और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर काफी हद तक निर्भर करती है।

किसानों की बढ़ी चिंता
मानसून की देरी और कम बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान, मक्का, दाल और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का समय करीब आ चुका है। अगर बारिश समय पर नहीं हुई तो खेती प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखें और जरूरत के अनुसार खेती की रणनीति बनाएं।
बढ़ती गर्मी से स्वास्थ्य पर असर
लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव का असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, सिरदर्द, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग दोपहर में धूप में निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

किन राज्यों में ज्यादा असर
उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में गर्मी का असर ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं दक्षिण भारत में मानसून की देरी के कारण उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को गर्मी और हीटवेव से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। जरूरी काम होने पर ही दोपहर में बाहर निकलें। हल्के कपड़े पहनें और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। किसानों को भी मौसम से जुड़े अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
यह खबर मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मौसम की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए IMD के ताजा अपडेट जरूर देखें।

