By: Mala Mandal
देवघर: एम्स देवघर ने नवजात शिशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 27 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मी मात्र 1.2 किलोग्राम वजन की अत्यंत प्री-टर्म नवजात बच्ची का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है। यह सफलता एम्स देवघर की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और नर्सिंग स्टाफ की कड़ी मेहनत का परिणाम है।

जानकारी के अनुसार, बच्ची का जन्म समय से लगभग तीन महीने पहले हुआ था। समय से पूर्व जन्म लेने के कारण उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। जन्म के तुरंत बाद उसे एम्स देवघर के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया।
शुरुआती दिनों में बच्ची को सांस लेने में गंभीर परेशानी थी। ऐसे में डॉक्टरों ने उसे पहले वेंटिलेटर सपोर्ट और बाद में सीपीएपी (CPAP) मशीन के माध्यम से श्वसन सहायता प्रदान की। लगातार मॉनिटरिंग, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और संक्रमण से बचाव के लिए अपनाए गए सख्त प्रोटोकॉल के कारण धीरे-धीरे बच्ची की हालत में सुधार आने लगा।

एम्स देवघर के नवजात रोग विभाग की टीम ने इलाज के दौरान बच्ची की हर छोटी-बड़ी चिकित्सा आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया। समय-समय पर आवश्यक जांच की गई और उसकी स्थिति के अनुसार उपचार में बदलाव किए गए। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में बच्ची का वजन बढ़ने लगा और स्वास्थ्य लगातार बेहतर होता गया।

इलाज की पूरी जिम्मेदारी बाल रोग विभाग के नेतृत्व में निभाई गई। विभागाध्यक्ष डॉ. सोमेश्वर निम्मबालकर और नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सहित पूरी मेडिकल टीम ने समन्वित रूप से बच्ची की देखभाल की। डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने भी दिन-रात मेहनत कर बच्ची की देखभाल सुनिश्चित की।
इलाज के दौरान बच्ची के माता-पिता को भी लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी जाती रही। डॉक्टरों ने उन्हें आवश्यक परामर्श दिया और नवजात की देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इससे परिवार का विश्वास भी बना रहा और उपचार प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ती रही।

एम्स देवघर के चिकित्सकों ने संक्रमण से बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। नवजात गहन चिकित्सा इकाई में सख्त एसेप्टिक प्रोटोकॉल का पालन किया गया ताकि बच्ची किसी भी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रह सके। यही कारण रहा कि इलाज के दौरान उसे किसी बड़ी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा।

इस सफल उपचार में कई अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ तथा अन्य विभागों के विशेषज्ञों ने समय-समय पर आवश्यक जांच और परामर्श देकर उपचार को सफल बनाने में योगदान दिया। बहु-विषयक चिकित्सा पद्धति (Multidisciplinary Approach) के कारण बच्ची का इलाज प्रभावी तरीके से संभव हो सका।
स्वस्थ होने के बाद बच्ची के माता-पिता ने एम्स देवघर के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पूरे स्वास्थ्यकर्मी दल का आभार व्यक्त किया। बच्ची के पिता मनीष जैकब और माता एले केथरीन ने कहा कि उनकी बच्ची को नया जीवन देने में एम्स देवघर की पूरी टीम की भूमिका अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने हर कदम पर उनका सहयोग किया और उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाए रखा।

बच्ची के दादा हेमंत जैकब ने भी चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एम्स देवघर ने न केवल उनकी पोती की जान बचाई, बल्कि पूरे परिवार को नई उम्मीद दी है। उन्होंने अस्पताल की आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और समर्पित चिकित्सकों की प्रशंसा की।

एम्स देवघर की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब झारखंड और आसपास के राज्यों के लोगों को गंभीर नवजात उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अत्याधुनिक NICU, आधुनिक उपकरणों और अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता के कारण अब देवघर में ही जटिल मामलों का सफल इलाज संभव हो रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 27 सप्ताह में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं का जीवित रहना और स्वस्थ होना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे बच्चों को लंबे समय तक विशेष निगरानी, संक्रमण से सुरक्षा, पोषण प्रबंधन और श्वसन सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ टीम, आधुनिक तकनीक और समय पर उपचार जीवन रक्षक साबित होते हैं।

एम्स देवघर की यह सफलता न केवल संस्थान की चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी विश्वस्तरीय सेवाएं देने में सक्षम हैं। इस उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों का भरोसा स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत होगा तथा भविष्य में गंभीर नवजात मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।

