By: Mala Mandal
देवघर: झारखंड के देवघर सदर अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत से जुड़ा है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्साकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही, गलत इंजेक्शन देने तथा पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य प्रवेश द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया।

मृतक की पहचान टिंटू पंडित के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार टिंटू पंडित के पैर में गंभीर घाव था, जिसके उपचार के लिए उन्हें देवघर सदर अस्पताल लाया गया। प्राथमिक जांच के बाद उन्हें अस्पताल के वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाने और सलाइन चढ़ाने के नाम पर अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मियों ने उनसे पैसे की मांग की।

परिजनों का कहना है कि पैसे मांगने के बाद मरीज को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि मरीज की हालत लगातार खराब होती रही, लेकिन वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने समय पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। कई बार सूचना देने के बावजूद किसी ने तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई।

मृतक के परिजनों ने बताया कि जब मरीज की हालत अत्यधिक नाजुक हो गई और अस्पताल कर्मियों की ओर से कोई मदद नहीं मिली, तब वे स्वयं टिंटू पंडित को कंधे पर उठाकर इमरजेंसी वार्ड की ओर ले जाने लगे। इसी दौरान रास्ते में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

घटना के बाद बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। कुछ समय तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

परिजनों का आरोप है कि यदि मरीज की बिगड़ती हालत पर समय रहते ध्यान दिया जाता और उचित इलाज मिलता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। उनका यह भी कहना है कि इलाज के दौरान पैसे मांगना और मरीज की शिकायतों को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मरीज को कौन-सा इंजेक्शन दिया गया था और मौत का वास्तविक कारण क्या है। मामले की पुष्टि मेडिकल जांच और संबंधित अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल परिसर में पुलिस भी पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने परिजनों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली। यदि परिजनों की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करती है। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल चिकित्सकीय लापरवाही का मामला होगा बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में किसी डॉक्टर, नर्स या अस्पताल कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

