By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले के जसीडीह स्थित एक निजी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती 13 वर्षीय किशोर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने नशा मुक्ति केंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए जसीडीह मुख्य सड़क को जाम कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

मृतक की पहचान झोंसागढ़ी निवासी अक्षत केसरी (13 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अक्षत पिछले कुछ समय से नशे की लत का शिकार हो गया था। नशे की वजह से उसका व्यवहार लगातार बदल रहा था और वह घर के सदस्यों के साथ अभद्रता व मारपीट करने लगा था। परिवार ने पहले उसे समझाने और सुधारने का प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी तो चिकित्सकीय सलाह और बेहतर भविष्य की उम्मीद में उसे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराने का निर्णय लिया गया।

परिजनों ने बताया कि 17 जुलाई को अक्षत को जसीडीह स्थित देवघर रुद्र फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था। भर्ती के बाद परिवार लगातार केंद्र के संचालकों के संपर्क में था और बच्चे की तबीयत तथा स्वास्थ्य की जानकारी लेता रहता था। परिजनों का कहना है कि उन्हें लगातार यही बताया जाता रहा कि बच्चे की स्थिति में सुधार हो रहा है और वह धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

मृतक के पिता ने बताया कि घटना से एक रात पहले भी उनकी नशा मुक्ति केंद्र के संचालक से बातचीत हुई थी। उस दौरान संचालक ने उन्हें बताया कि अक्षत ने खाना खा लिया है, वह आराम से सो गया है और पहले की तुलना में उसकी स्थिति बेहतर है। इस जानकारी के बाद परिवार पूरी तरह निश्चिंत हो गया था।
हालांकि, अगली सुबह अचानक नशा मुक्ति केंद्र से फोन आया कि बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई है और परिजन तुरंत केंद्र पहुंचें। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य घबराकर जसीडीह स्थित केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही अक्षत की मौत हो चुकी थी। बेटे का शव देखते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और देखते ही देखते उनका दुख आक्रोश में बदल गया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि नशा मुक्ति केंद्र में बच्चों और मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। उनका कहना है कि केंद्र में बाउंसर रखे गए हैं, जो नशा छोड़ने आए बच्चों और युवाओं के साथ मारपीट करते हैं। परिवार का आरोप है कि अक्षत की मौत भी मारपीट और प्रताड़ना का परिणाम हो सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।

घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग नशा मुक्ति केंद्र के बाहर जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने जसीडीह मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क जाम के दौरान लोगों ने नशा मुक्ति केंद्र के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जसीडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही, मारपीट या अन्य आपराधिक कृत्य सामने आता है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि घटना में शामिल जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाएगा।

फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगा। इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्र के कर्मचारियों, संचालकों और वहां मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। यदि आवश्यक हुआ तो केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जाएगी।

यह घटना नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली और वहां रहने वाले मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के दौरान मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार, चिकित्सकीय निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण बेहद आवश्यक है। यदि कहीं भी मरीजों के साथ हिंसा या दुर्व्यवहार होता है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि उपचार की मूल भावना के भी विपरीत है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिजन अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। पूरे देवघर जिले में इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश और चिंता का माहौल है।

