By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। बाढ़, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन जैसे-जैसे मलबे को हटाया जा रहा है, वैसे-वैसे त्रासदी की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 962 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

नुवाकोट में एक ही घर से मिले 24 शव
नेपाल के नुवाकोट जिले से सामने आई घटना ने इस आपदा की भयावहता को और उजागर कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल जब मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रहे थे, तभी एक ही घर के मलबे से 24 शव बरामद किए गए। रिपोर्टों के अनुसार यह घटना नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका-10 के वेत्रावती क्षेत्र में सामने आई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक बरामद शवों में महिलाएं, पुरुष और एक बच्चा भी शामिल है। शवों को बाहर निकालने के बाद पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक ही घर से इतने शव मिलने की घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। राहत दलों के लिए भी यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि कई इलाकों में अभी भी मलबा, तेज बहाव और खराब मौसम बचाव कार्य में बाधा डाल रहे हैं।

4000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता
नेपाल में आपदा के बाद सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। कई गांवों और बस्तियों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने के कारण लोगों की सही जानकारी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लापता लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने उनकी पहचान और लोकेशन पता लगाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बाढ़ और भूस्खलन ने मचाई तबाही
नेपाल में इस आपदा के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल गया। कई घर और सड़कें इसकी चपेट में आ गईं। कई स्थानों पर अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए, जिससे राहत और बचाव अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को तलाशना, घायलों को अस्पताल पहुंचाना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।

शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ नेपाल प्रशासन के सामने शवों की पहचान की चुनौती भी बढ़ गई है। कई शवों की तत्काल पहचान नहीं हो पा रही है। अधिकारियों द्वारा अज्ञात शवों के DNA नमूने सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है, ताकि भविष्य में परिवारों को पहचान में मदद मिल सके। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण अस्पतालों और शवगृहों पर भी दबाव बढ़ा है। प्रशासन के सामने एक तरफ मृतकों की पहचान और सम्मानजनक अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ संभावित स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को नियंत्रित करने की चुनौती भी है।

भारत तक पहुंचा बाढ़ का असर
नेपाल में आई बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों में भी देखने को मिला है। रिपोर्टों के अनुसार नेपाल से बहकर कुछ शव भारत के उत्तर प्रदेश के कुशीनगर क्षेत्र तक पहुंचे हैं। वहां स्थानीय प्रशासन ने शवों को बरामद कर उनकी पहचान और संबंधित अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की है। सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नेपाल और भारत दोनों देशों के लिए यह आपदा मानवीय स्तर पर बेहद गंभीर चुनौती बन गई है।

राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान तेज किया गया है। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच प्रशासन की ओर से लोगों से नदी और निचले इलाकों से दूर रहने तथा स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की जा रही है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ या भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई इलाकों में राहत दल पूरी तरह से नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नुवाकोट में एक ही घर से 24 शवों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि आपदा ने कई परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया है। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। साथ ही लापता लोगों की तलाश तेज हो और मृतकों की पहचान कर उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाई जा सके।
फिलहाल नेपाल की यह त्रासदी पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक गंभीर मानवीय संकट बनी हुई है। राहत एजेंसियों की चुनौती केवल जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों लापता लोगों की तलाश, मृतकों की पहचान और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी उनके सामने है।

