By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली/हल्द्वानी। वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन को लेकर जताई गई आपत्ति के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने राहुल गांधी को ‘राहुल मियां’ कहकर संबोधित किया और कहा कि वह वंदे मातरम् के महत्व को समझ ही नहीं सकते।

नितिन नवीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि ऐतिहासिक रूप से केवल शुरुआती दो अंतरों के गायन को लेकर एक विचारपूर्ण परंपरा रही है।
इसी विवाद को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। नितिन नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी भावनाओं और बलिदान की पहचान है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे वंदे मातरम् के महत्व को समझ नहीं सकते। उनके बयान के मुताबिक, इस गीत की गूंज से प्रेरित होकर देश के अनेक लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान और बलिदान दिया था।

नितिन नवीन ने कांग्रेस की राजनीतिक सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर आपत्ति जताकर देश की भावनाओं से दूरी बना रही है। भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति को नहीं समझने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहिए। यह बयान सामने आने के बाद वंदे मातरम् का मुद्दा राजनीतिक बहस का एक बड़ा विषय बन गया है।
दरअसल, वंदे मातरम् को लेकर मौजूदा विवाद केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस भी इस मुद्दे पर कांग्रेस से अलग रुख रखती नजर आई। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन को संवैधानिक दायित्व बताया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपने पुराने रुख का हवाला देते हुए शुरुआती दो अंतरों के गायन की परंपरा पर जोर दिया है।

इस राजनीतिक विवाद ने विपक्षी गठबंधन के भीतर भी मतभेद को उजागर कर दिया है। कांग्रेस की ओर से नेशनल कॉन्फ्रेंस को स्वतंत्रता सेनानियों के ऐतिहासिक निर्णय और उस समय की परिस्थितियों का सम्मान करने की सलाह दी गई। इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कांग्रेस के कुछ नेताओं और मुख्यमंत्रियों के ऐसे कार्यक्रमों के वीडियो सामने रखे, जिनमें वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने की बात कही गई। इससे कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर सवाल उठने लगे हैं।
गुजरात विधानसभा में भी वंदे मातरम् को लेकर विवाद देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला शुरुआती दो अंतरों के बाद बैठ गए, जबकि मौजूद अन्य कांग्रेस विधायक खड़े रहे। भाजपा ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस विधायक ने अपनी कार्रवाई को व्यक्तिगत निर्णय बताया और इसे पार्टी के पुराने रुख से जोड़ा।

वहीं, भाजपा लगातार इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है। नितिन नवीन ने भी अपने बयान में वंदे मातरम् को स्वतंत्रता आंदोलन के बलिदानों से जोड़ते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराना जरूरी है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक मंचों पर और जोर पकड़ सकता है।

कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर यह तर्क दिया जा रहा है कि वंदे मातरम् के संदर्भ में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी ने शुरुआती दो अंतरों के गायन को लेकर अपने पुराने रुख को दोहराया है। कांग्रेस का कहना है कि यह विषय केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि इतिहास और उस समय के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ को समझने का भी है।

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम् देश के स्वतंत्रता संघर्ष की महत्वपूर्ण पहचान रहा है और इसके पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताना उचित नहीं है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए नितिन नवीन ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया और उनके लिए ‘राहुल मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया। उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

अब सवाल यह है कि वंदे मातरम् को लेकर चल रही यह बहस आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है। क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगी या फिर राष्ट्रीय गीत के गायन और उसके ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर देश में व्यापक बहस शुरू होगी? फिलहाल इतना साफ है कि भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं और नितिन नवीन के बयान ने इस विवाद को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।
आप नितिन नवीन की राहुल गांधी पर ‘वंदे मातरम्’ वाली टिप्पणी को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।


