By: Mala Mandal
देवघर। देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास नई रेल लाइन को परिचालन के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गुरुवार को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS), पूर्वी सर्किल ने देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास नई रेल लाइन का विस्तृत निरीक्षण किया। सीआरएस ने जसीडीह स्थित रोहिणी से लेकर बदना टील्हा स्थित जसीडीह लिंक केबिन तक नई रेल लाइन का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान रेलवे के अधिकारियों और अभियंताओं की टीम भी मौजूद रही। सीआरएस निरीक्षण के दौरान नई रेल लाइन के निर्माण की गुणवत्ता, ट्रैक की मजबूती, सुरक्षा मानकों और निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई। इसके साथ ही नई पटरी पर स्पीड ट्रायल भी किया गया। अब निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे की ओर से सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी किए जाने का इंतजार है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, करीब चार से पांच दिनों में सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी होने की उम्मीद है।

ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की हुई जांच
देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास का निर्माण पूरा होने के बाद अब इसे रेल परिचालन में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसी क्रम में सीआरएस द्वारा ट्रैक का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ट्रैक की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को परखा गया। नई रेल लाइन पर स्पीड ट्रायल भी किया गया, ताकि ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया जा सके। रेलवे अधिकारियों और अभियंताओं ने निरीक्षण के दौरान सीआरएस को परियोजना से संबंधित विभिन्न तकनीकी जानकारियां भी उपलब्ध कराईं। निरीक्षण के बाद प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज खां ने बताया कि सीआरएस ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और परियोजना से जुड़े कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सामने आई विभिन्न चुनौतियों को रेलवे की तकनीकी टीम ने बेहतर तरीके से पूरा किया।

पेड़ों की कटाई के बदले दोगुने पौधरोपण का लक्ष्य
प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज खां ने बताया कि देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास रेल लाइन के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। इसके एवज में रेलवे की ओर से राज्य सरकार को राशि का भुगतान किया गया है, ताकि निर्धारित संख्या के मुकाबले दोगुने पौधे लगाए जा सकें। उन्होंने बताया कि पौधरोपण का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा रेलवे की ओर से अपने स्तर पर भी करीब 1500 पौधे लगाए जा चुके हैं। रेलवे की ओर से भविष्य में भी पौधरोपण जारी रखने की बात कही गई है। इससे रेल परियोजना के निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है।

चट्टानों को काटना रहा सबसे चुनौतीपूर्ण काम
रेलवे बाईपास लाइन के निर्माण के दौरान कई तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। मनोज खां के अनुसार, परियोजना के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती चट्टानों को काटकर हटाना था। कई जगहों पर चट्टानें इतनी मजबूत थीं कि सामान्य मशीनों की मदद से उन्हें काटना संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसी स्थिति में रेलवे की निर्माण टीम ने विशेष केमिकल तकनीक का सहारा लिया। इस तकनीक की मदद से चट्टानों को काटकर हटाया गया और नई रेल लाइन के निर्माण का रास्ता तैयार किया गया। इसके अलावा मजबूत कंक्रीट की दीवार का निर्माण भी चुनौतीपूर्ण कार्य था। रेलवे के इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने इन चुनौतियों को पूरा करते हुए परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया।

इंजन बदलने में बचेगा एक से डेढ़ घंटे तक का समय
देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास नई रेल लाइन के शुरू होने के बाद ट्रेनों के परिचालन में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। वर्तमान व्यवस्था के तहत कोलकाता सहित अन्य प्रमुख स्थानों से आने वाली कुछ ट्रेनों को जसीडीह में इंजन बदलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ घंटे तक का समय लग जाता है। नई बाईपास लाइन के चालू होने के बाद ट्रेनों को जसीडीह में इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय बचेगा। साथ ही जसीडीह स्टेशन पर इंजन बदलने के कारण होने वाली देरी में भी कमी आएगी। रेल यात्रियों के लिए भी यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रेनों के जसीडीह में अनावश्यक रूप से रुकने का समय कम होने से यात्रियों को अपनी यात्रा पूरी करने में कम समय लग सकता है। इससे देवघर और आसपास के क्षेत्र से रेल यात्रा करने वाले लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा प्रमाणपत्र के बाद शुरू होगी आगे की प्रक्रिया
सीआरएस के निरीक्षण के बाद अब नई रेल लाइन के परिचालन की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी होना है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और करीब चार से पांच दिनों में सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी होने की उम्मीद है। सुरक्षा प्रमाणपत्र मिलने के बाद नई रेल लाइन को परिचालन में शामिल करने की दिशा में रेलवे की ओर से आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद इस बाईपास से ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो सकता है।

देवघर के रेल नेटवर्क के लिए अहम परियोजना
देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास को स्थानीय रेल व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। नई रेल लाइन के चालू होने से ट्रेनों के परिचालन में समय की बचत के साथ जसीडीह स्टेशन पर इंजन बदलने की आवश्यकता कम होगी। इससे रेलवे के परिचालन को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

सीआरएस निरीक्षण और स्पीड ट्रायल के बाद परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी होता है, तो आने वाले समय में नई रेल लाइन के परिचालन में शामिल होने की उम्मीद है। इससे देवघर-जसीडीह क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को भी एक नई सुविधा मिलने की संभावना है।Meta
देवघर-रोहिणी रेलवे बाईपास नई रेल लाइन का CRS ने निरीक्षण किया। स्पीड ट्रायल भी हुआ। सुरक्षा प्रमाणपत्र 4-5 दिनों में जारी होने की उम्मीद है। लाइन शुरू होने से ट्रेनों का इंजन बदलने में डेढ़ घंटे तक का समय बचेगा।


