By:Mala Mandal
देवघर। बैंक कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को देवघर में बैंक कर्मियों ने आंदोलन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर कचहरी रोड स्थित स्टेट बैंक मुख्य शाखा (साधना भवन) के बाहर बड़ी संख्या में बैंक कर्मी एकजुट हुए और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इस दौरान कर्मचारियों ने बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग सरकार और संबंधित संस्थाओं से की। आंदोलन के दौरान बैंक कर्मियों ने कहा कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों को लेकर समय-समय पर सरकार और संबंधित संगठनों के समक्ष बात रखी जाती रही है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण बैंक कर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है। इसी के विरोध में देशव्यापी आंदोलन के तहत देवघर में भी बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन किया।

देशभर में करीब आठ लाख बैंक कर्मी आंदोलन में शामिल
एसबीआई संगठन के मिथिलेश कुमार ने बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर देशभर में करीब आठ लाख बैंक कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों की मांगों में छुट्टी व्यवस्था, पूर्ण पेंशन और परफॉर्मेंस लिंक इंसेंटिव यानी पीएलआई में सुधार प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मियों की मांगों का संबंध केवल कर्मचारियों के हित से नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उनके भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन लगातार अपनी आवाज उठाते रहे हैं।

महीने में दो शुक्रवार की छुट्टी की मांग
बैंक कर्मियों की प्रमुख मांगों में महीने में दो शुक्रवार को अवकाश की व्यवस्था लागू करना शामिल है। मिथिलेश कुमार के अनुसार, वर्ष 2015 में महीने के दो शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टी की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। उस समय कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि भविष्य में इस व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाएगा। बैंक कर्मचारी संगठन का कहना है कि आश्वासन के बावजूद अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, वर्ष 2024 में इंडियन बैंक एसोसिएशन की ओर से भी वित्त मंत्री के समक्ष शुक्रवार को बैंक अवकाश की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई थी। इसके बावजूद करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस मांग पर अपेक्षित निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है। बैंक कर्मियों का कहना है कि अवकाश व्यवस्था में सुधार से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। इसी कारण संगठन की ओर से इस मांग को लगातार प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

पूर्ण पेंशन लागू करने की मांग
आंदोलन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने पूर्ण पेंशन लागू करने की मांग भी उठाई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पेंशन व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। मिथिलेश कुमार ने कहा कि पूर्ण पेंशन बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा उनके लिए महत्वपूर्ण विषय है और इस दिशा में सरकार तथा संबंधित संस्थाओं को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

पीएलआई व्यवस्था में सुधार की मांग
बैंक कर्मियों ने परफॉर्मेंस लिंक इंसेंटिव यानी पीएलआई की वर्तमान व्यवस्था में भी सुधार की मांग की है। कर्मचारी संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच इंसेंटिव को लेकर बड़ा अंतर है। मिथिलेश कुमार के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी के आधार पर अधिकारियों को 365 दिनों का पीएलआई दिया जा रहा है, जबकि निचले स्तर से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारियों को मात्र 15 दिनों का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि बैंक के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने में हर स्तर के कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इंसेंटिव व्यवस्था भी सभी कर्मचारियों के लिए समान और न्यायसंगत आधार पर होनी चाहिए। यूनियन की मांग है कि पीएलआई की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर उसमें आवश्यक सुधार किया जाए। कर्मचारियों के प्रदर्शन और योगदान को ध्यान में रखते हुए सभी स्तर के कर्मचारियों को उचित इंसेंटिव मिलना चाहिए।

मांगें नहीं मानी गईं तो आगे तेज होगा आंदोलन
बैंक कर्मियों ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार का आंदोलन उनकी मांगों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन का हिस्सा है। कर्मचारी संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। मिथिलेश कुमार ने बताया कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 28, 29 और 30 सितंबर को बैंक कर्मी पुनः आंदोलन करेंगे। इसके बाद भी यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 26 अक्टूबर से बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

बैंक कर्मचारियों के आंदोलन और संभावित हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल कर्मचारी संगठन का मुख्य जोर अपनी मांगों को सरकार और संबंधित संस्थाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा लंबित मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय कराने पर है।

देवघर में शुक्रवार को हुए आंदोलन के दौरान बैंक कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि आगे आंदोलन को व्यापक रूप देने की आवश्यकता न पड़े। अब सभी की नजर सरकार और संबंधित बैंकिंग संगठनों की ओर से होने वाली अगली पहल पर टिकी है।

