By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का मामला?
25 सितंबर 2026 को अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार पर SIR से संबंधित वैधानिक कर्तव्यों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जिन फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लागू किया गया, उनकी कानूनी वैधता की जांच की जाए। याचिका में ऐसे फैसलों को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने की मांग भी की गई है।

SIR को लेकर क्या हैं आरोप?
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इसी प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर याचिका में सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप है कि मतदाता पंजीकरण, वोटर लिस्ट डेटाबेस, मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने और Form 6 में बदलाव से संबंधित कुछ निर्णयों पर चुनाव आयोग के भीतर असहमति थी। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का भी उल्लेख याचिका में किया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने कहा है कि SIR सहित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों और आयोग के पक्ष के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है।

13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा
याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने का अनुरोध किया है। याचिका में प्रस्तावित जांच के तहत चुनावी डेटाबेस और संबंधित तकनीकी प्रणालियों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी बताई गई है। हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने से जुड़ा आंकड़ा याचिका में लगाए गए आरोप का हिस्सा है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

Form 6 में बदलाव का भी मुद्दा
मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव भी इस विवाद का अहम हिस्सा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Form 6 में किए गए कुछ बदलावों की प्रक्रिया और उनके कानूनी आधार पर सवाल उठते हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मूल कानूनी Form 6 को बहाल करने की मांग की है। इसके साथ ही चुनावी डेटाबेस से संबंधित रिकॉर्ड, सर्वर लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि किसी स्वतंत्र जांच की स्थिति में संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध रह सकें।

किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग?
याचिका में केवल CEC ज्ञानेश कुमार का ही नाम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और ECI की IT से जुड़ी अधिकारी सीमा खन्ना के खिलाफ भी कथित वैधानिक कर्तव्य उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा।

चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
SIR को लेकर सामने आए इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू चुनाव आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया है। हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ मुद्दों पर असहमति के दावे सामने आए हैं। इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर अदालत में दायर याचिका में आयोग के निर्णयों और प्रक्रियाओं की कानूनी समीक्षा की मांग की गई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कथित असहमति के दावों के विपरीत यह कहा है कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ऐसे में अब इस मामले में दस्तावेज, रिकॉर्ड और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों की भूमिका अहम हो सकती है।

आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। याचिकाकर्ता ने CEC और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, विवादित निर्णयों की समीक्षा, Form 6 को लेकर निर्देश और SIR प्रक्रिया में कथित मतदाता विलोपन की स्वतंत्र जांच जैसी कई मांगें रखी हैं। फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि याचिका में लगाए गए आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट यदि मामले पर सुनवाई करता है, तो संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की दिशा तय हो सकती है।

SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में दाखिल यह याचिका चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके से जुड़े कई कानूनी सवालों को अदालत के सामने ले आई है।

