By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। देवघर नगर निगम की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी उठापटक और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। राजनीतिक गतिरोध के बीच मेयर की ओर से पार्षदों के साथ संवाद और समन्वय स्थापित करने की पहल का असर हालिया बोर्ड बैठक में देखने को मिला। बैठक के दौरान नगर के विकास और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई तथा कई प्रस्तावों पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया।
नगर निगम की राजनीति में हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर खींचतान की स्थिति बनी हुई थी। बोर्ड की पूर्व निर्धारित बैठक को स्थगित किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, इसके बाद मेयर ने निगम के पार्षदों के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। पार्षदों के साथ बातचीत के जरिए मतभेदों को कम करने और निगम के कामकाज को विकास के मुद्दों पर केंद्रित करने की कोशिश की गई।

संवाद के जरिए गतिरोध दूर करने की पहल
नगर निगम से जुड़े लोगों के अनुसार, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए मेयर की ओर से सभी वार्ड पार्षदों के साथ सीधे संवाद की पहल की गई। इसका उद्देश्य निगम के भीतर बेहतर समन्वय स्थापित करना और बोर्ड की बैठकों में विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा का माहौल तैयार करना था।
राजनीतिक गतिरोध के बीच संवाद की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नगर निगम का कामकाज सीधे तौर पर शहर की बुनियादी सुविधाओं और नागरिक सेवाओं से जुड़ा है। सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े निर्णयों का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है।

बोर्ड बैठक में विकास के मुद्दे केंद्र में
हालिया बोर्ड बैठक में निगम क्षेत्र की आवश्यक विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक का माहौल पूर्व की तुलना में अधिक सौहार्दपूर्ण रहा। विभिन्न वार्डों से जुड़े पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को सामने रखा। इसके बाद विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई।
बैठक के बाद पार्षदों के बीच संतोष का माहौल देखने को मिला। निगम की राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह संवाद और समन्वय के साथ बोर्ड की बैठकें होती रहीं, तो शहर के विकास कार्यों को गति देने में मदद मिल सकती है।

राजनीतिक टकराव से विकास की ओर फोकस
नगर निगम की मौजूदा परिस्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है। नगर निगम एक स्थानीय निकाय है, जहां राजनीतिक मतभेदों का सीधा असर नागरिक सुविधाओं और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में बोर्ड के भीतर सहमति और समन्वय को महत्वपूर्ण माना जाता है।
मेयर की ओर से भी कथित तौर पर इसी दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। राजनीतिक विवादों को आगे बढ़ाने के बजाय पार्षदों के साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की रणनीति अपनाई गई। इससे बोर्ड की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ।

झामुमो में भी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता
मेयर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से जुड़े एक उभरते राजनीतिक चेहरे के रूप में भी चर्चा में हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनकी कार्यशैली और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि युवा नेतृत्व, सहज व्यवहार और संवाद की राजनीति उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।
हालांकि, किसी भी जनप्रतिनिधि की राजनीतिक भूमिका का आकलन उनके कार्यों, निर्णयों और जनता के बीच उनके काम के आधार पर किया जाता है। ऐसे में आने वाले समय में नगर निगम के विकास कार्यों और बोर्ड के फैसलों को लागू करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

विवादों से दूरी, जनहित पर जोर देने का दावा
मेयर के समर्थकों का कहना है कि विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप को प्राथमिकता नहीं दी और नगर निगम के कामकाज को विकास के मुद्दों पर केंद्रित रखने की कोशिश की। उनका दावा है कि टकराव की राजनीति के बजाय संवाद और समन्वय के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
नगर निगम में किसी भी विकास योजना को धरातल पर उतारने के लिए मेयर, नगर आयुक्त, पार्षदों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसके अलावा योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन, प्रशासनिक स्वीकृति और समयबद्ध क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

आगे की राह पर रहेगी नजर
हालिया बोर्ड बैठक के बाद नगर निगम की राजनीति में फिलहाल सकारात्मक माहौल बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस माहौल को स्थायी बनाए रखना और इसे वास्तविक विकास कार्यों में बदलना आने वाले समय की बड़ी चुनौती होगी।
देवघर शहर तेजी से विस्तार कर रहा है और बढ़ती आबादी के साथ नागरिक सुविधाओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नगर निगम के सामने साफ-सफाई, जलापूर्ति, सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक स्तर पर यदि बोर्ड के भीतर संवाद और सहमति का माहौल कायम रहता है, तो इसका लाभ विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में मिल सकता है। फिलहाल हालिया बैठक ने यह संकेत जरूर दिया है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच विकास के मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। अब इस सहमति का असर नगर निगम क्षेत्र में होने वाले वास्तविक विकास कार्यों पर कितना दिखाई देता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


