By: Mala Mandal
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से माताएं आज जितिया व्रत रखेंगी। हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जितिया व्रत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की सलामती और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत करती हैं। व्रत के दौरान अन्न और जल का त्याग किया जाता है और प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने तथा व्रत कथा सुनने की परंपरा है। जितिया व्रत खासतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। माताएं व्रत का संकल्प लेकर दिनभर संयम रखती हैं और शाम के समय विधि-विधान से पूजा करती हैं।

संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है जितिया व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत संतान की दीर्घायु और उसके सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। माताएं अपनी संतान के लिए भगवान जीमूतवाहन से प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान पर भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में माताएं कठिन नियमों का पालन करती हैं और अपनी संतान के कल्याण की कामना करती हैं। व्रत के अगले दिन पारंपरिक विधि से इसका पारण किया जाता है।

प्रदोष काल में होती है भगवान जीमूतवाहन की पूजा
जितिया व्रत में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम के समय महिलाएं पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा स्थान को साफ करके वहां भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन को श्रद्धा के साथ पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करते हुए पूजा की जाती है। पूजा के दौरान जितिया व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है।

जितिया व्रत में क्यों सुनी जाती है व्रत कथा?
धार्मिक मान्यताओं में व्रत कथा का विशेष महत्व बताया गया है। जितिया व्रत के दौरान भगवान जीमूतवाहन से जुड़ी कथा सुनने की परंपरा है। कथा में त्याग, करुणा और संतान की रक्षा से जुड़ी मान्यताओं का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि व्रत कथा सुनने से व्रत का धार्मिक पक्ष पूरा होता है और भगवान जीमूतवाहन के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। महिलाएं सामूहिक रूप से भी कथा सुनती हैं और पूजा के बाद संतान के लिए मंगलकामना करती हैं।

जितिया धागे का क्या है महत्व?
जितिया व्रत में धागे का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं पूजा के दौरान विशेष धागा धारण करती हैं। इसे संतान की रक्षा और मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। परंपरा के अनुसार जितिया का धागा श्रद्धा और व्रत के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे धारण करने की विधि और परंपरा अलग हो सकती है। इसलिए अपने परिवार या स्थानीय परंपरा के अनुसार इसकी पूजा और धारण की विधि का पालन किया जाता है।

जितिया व्रत के दिन क्या करें?
जितिया व्रत रखने वाली माताएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन संयम और श्रद्धा के साथ व्रत रखें। पूजा के लिए शाम के समय घर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें। पूजा के दौरान फल, फूल और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद जितिया व्रत की कथा सुनें और संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।

जितिया व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
जितिया व्रत कठिन निर्जला व्रत माना जाता है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी महिला को कोई स्वास्थ्य समस्या है, गर्भावस्था है या डॉक्टर ने उपवास करने से मना किया है, तो धार्मिक व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। व्रत के दौरान पूजा-पाठ के साथ मन को शांत रखना और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत की विधि, पूजा सामग्री और पारण का तरीका क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

जितिया व्रत का धार्मिक संदेश क्या है?
जितिया व्रत केवल उपवास की परंपरा नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच प्रेम, ममता और संतान के मंगल की कामना से जुड़ा धार्मिक पर्व माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के स्वस्थ, दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में जितिया के अवसर पर महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। इससे परिवार और समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की भावना भी जुड़ी हुई है।

आज जितिया व्रत पर क्या करें?
आज स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारी करें। प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें और जितिया व्रत की कथा सुनें। संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करें। पूजा के दौरान जितिया धागे की परंपरा का पालन भी अपने क्षेत्र और परिवार की मान्यता के अनुसार कर सकती हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक जानकारी पर आधारित है। जितिया व्रत की पूजा विधि, धागा धारण करने की परंपरा, पूजा का समय और पारण की विधि अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में अलग हो सकती है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें और आवश्यकता होने पर चिकित्सक की सलाह लें।

