By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 6 October 2026: आज 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। पितृपक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, पितरों का स्मरण और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। आज के पंचांग में एकादशी तिथि के साथ आश्लेषा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी उल्लेख है।
अगर आप आज पूजा-पाठ, व्रत, दान या किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो तिथि, नक्षत्र, योग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी जानना उपयोगी रहेगा। आइए जानते हैं 6 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व और आज के दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आज का पंचांग 6 अक्टूबर 2026
दिन: मंगलवार
तिथि: आश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी
पर्व: इंदिरा एकादशी व्रत
विक्रम संवत: 2083
पक्ष: कृष्ण पक्ष
नक्षत्र: आश्लेषा, रात लगभग 10:17 बजे तक; इसके बाद मघा नक्षत्र
योग: सिद्ध योग सुबह लगभग 7:20 बजे तक, इसके बाद साध्य योग
करण: बव करण दोपहर लगभग 1:19 बजे तक, इसके बाद बालव करण
सूर्योदय: पटना में लगभग सुबह 5:43 बजे
सूर्यास्त: पटना में लगभग शाम 5:31 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद लगभग 12:35 बजे
ध्यान दें कि पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पटना के आधार पर दिए गए हैं।

आज मनाई जा रही है इंदिरा एकादशी
हिंदू धर्म में इंदिरा एकादशी को पितृपक्ष की महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने और पितरों के लिए प्रार्थना करने से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
इंदिरा एकादशी का संबंध पितृपक्ष से होने के कारण इस दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों की सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।
इस दिन व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करके व्रत का पालन करते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठिन उपवास करने के बजाय अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

इंदिरा एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा की तैयारी की जा सकती है। पूजा में भगवान विष्णु या श्रीहरि के स्वरूप के सामने दीपक जलाकर फल, फूल, तुलसी दल और अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
आज के लिए प्रकाशित पंचांग विवरण में अभिजीत मुहूर्त लगभग सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक बताया गया है। हालांकि, यह समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना भी श्रद्धालुओं की परंपराओं में शामिल है।

आज बन रहे हैं कौन-कौन से शुभ योग?
सिद्ध योग: पंचांग के अनुसार, आज सिद्ध योग सुबह लगभग 7:20 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को कार्यों की सिद्धि और धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग: आज के पंचांग में सर्वार्थ सिद्धि योग का भी उल्लेख है। इसे पारंपरिक ज्योतिष में शुभ योग माना जाता है। हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए इसकी उपयुक्तता तय करते समय स्थानीय पंचांग और उस कार्य से संबंधित मुहूर्त को देखना चाहिए।
साध्य योग: सिद्ध योग के बाद साध्य योग शुरू होगा, जो अगले दिन सुबह लगभग 5 बजे तक रहने का उल्लेख है। ज्योतिषीय मान्यताओं में साध्य योग को योजनाबद्ध प्रयासों और लक्ष्य की दिशा में काम करने से जोड़ा जाता है।
शुभ योगों का उल्लेख धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। किसी योग का होना अपने आप में हर कार्य के लिए शुभ समय होने की गारंटी नहीं है।

आज का राहुकाल कब रहेगा?
मंगलवार को राहुकाल का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार निर्धारित होता है। पटना के लिए उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार राहुकाल का समय लगभग दोपहर 3 बजे से शाम 4:30 बजे तक माना जा सकता है।
परंपरागत ज्योतिष में राहुकाल के दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, पूजा-पाठ, नियमित धार्मिक गतिविधियों और पहले से चल रहे कार्यों के संबंध में अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं हो सकती हैं।
राहुकाल का समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए किसी महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन या शुभ कार्य से पहले अपने स्थानीय पंचांग में समय अवश्य जांच लें।

इंदिरा एकादशी की पूजा विधि
सुबह स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की पूजा: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं और फल, फूल, तुलसी दल तथा उपलब्ध पूजन सामग्री अर्पित करें।
मंत्र जाप और पाठ: इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या अन्य धार्मिक पाठ भी कर सकते हैं।

पितरों का स्मरण: पितृपक्ष में आने के कारण इंदिरा एकादशी पर पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना महत्वपूर्ण माना जाता है। तर्पण या श्राद्ध कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार करें।
दान-पुण्य: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में सेवा और दान को विशेष महत्व दिया गया है।
इंदिरा एकादशी पर क्या करें?
इंदिरा एकादशी पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करें, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें। परिवार में शांति बनाए रखना, जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और पूर्वजों का सम्मान करना भी इस दिन के महत्वपूर्ण धार्मिक भावों में शामिल है।
यदि परिवार में पितृपक्ष से जुड़े विशेष नियमों का पालन किया जाता है, तो उसी परंपरा के अनुसार पूजा और अन्य धार्मिक कर्म करना उचित रहेगा।

इंदिरा एकादशी पर किन बातों का रखें ध्यान?
व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को उपवास के नियम अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय करने चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और धार्मिक कर्मकांड को श्रद्धा के साथ पूरा करें। दान करते समय अपनी आर्थिक क्षमता का ध्यान रखें। किसी भी धार्मिक मान्यता को लेकर भय या अनावश्यक चिंता करने के बजाय इस दिन को भक्ति, संयम और सेवा के भाव से मनाएं।
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण कब करें?
इंदिरा एकादशी का व्रत सामान्यतः द्वादशी तिथि में पारण करके पूरा किया जाता है। इस वर्ष एकादशी तिथि 7 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद समाप्त होगी। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, 7 अक्टूबर को सुबह लगभग 6:16 बजे से 8:39 बजे तक पारण का समय बताया गया है।
पारण का सही समय स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि कर लें। व्रत का पारण निर्धारित विधि और अपनी परंपरा के अनुसार करना चाहिए।
आज के पंचांग का धार्मिक महत्व
6 अक्टूबर 2026 का दिन इंदिरा एकादशी और पितृपक्ष के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, मंत्र जाप और पितरों का स्मरण कर सकते हैं। पंचांग में बताए गए तिथि, नक्षत्र और योग धार्मिक कार्यों की योजना बनाने में सहायता करते हैं।
आज के दिन श्रद्धा, संयम और सेवा के भाव से पूजा-पाठ करना तथा जरूरतमंदों की मदद करना इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।
इस लेख में दी गई धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं तथा उपलब्ध पंचांग विवरण पर आधारित है। शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और अन्य समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी विशेष पूजा, व्रत या पारण के लिए स्थानीय पंचांग अथवा योग्य पुरोहित से पुष्टि करें।
