By: Mala Mandal
Aparajita Plant Cutting: अगर आपकी बालकनी या घर की खिड़की के पास अपराजिता की बेल लगी है और आप उसी पौधे से कई नए पौधे तैयार करना चाहते हैं, तो इसके लिए कटिंग एक आसान तरीका हो सकता है। अपराजिता अपने खूबसूरत नीले, सफेद या अन्य रंगों के फूलों के कारण घर की खूबसूरती बढ़ाती है। अच्छी देखभाल मिलने पर इसकी बेल तेजी से बढ़ सकती है और कुछ समय बाद फूलों से पूरी बालकनी को आकर्षक बना सकती है। खास बात यह है कि नया पौधा तैयार करने के लिए आपको हर बार नर्सरी से पौधा खरीदने की जरूरत नहीं होती। एक स्वस्थ अपराजिता की शाखा से कई कटिंग तैयार करके उन्हें अलग-अलग गमलों में लगाया जा सकता है। हालांकि कटिंग से पौधा तैयार होने की सफलता मौसम, नमी, मिट्टी और कटिंग की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

अपराजिता की कटिंग के लिए कैसी शाखा चुनें?
कटिंग से नया पौधा तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण बात सही शाखा का चुनाव है। हमेशा ऐसी शाखा चुनें जो स्वस्थ, हरी और मजबूत हो। शाखा पर किसी तरह के कीड़े, फंगस, काले धब्बे या बीमारी के लक्षण नहीं होने चाहिए। लगभग 8 से 15 सेंटीमीटर लंबी शाखा कटिंग के लिए ली जा सकती है। कोशिश करें कि उस शाखा में कम से कम 2 से 3 गांठ यानी नोड मौजूद हों। इन्हीं गांठों के आसपास से नई जड़ें और आगे चलकर नई शाखाएं विकसित हो सकती हैं। बहुत ज्यादा कोमल या बिल्कुल सूखी हुई शाखा लेने से बचें। मध्यम रूप से स्वस्थ और सक्रिय बढ़त वाली शाखा कटिंग के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है।

कटिंग काटने का सही तरीका
कटिंग काटने के लिए हमेशा साफ और तेज धार वाली कैंची या प्रूनर का इस्तेमाल करें। कुंद या गंदी कैंची से काटने पर तने को नुकसान पहुंच सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। शाखा को नोड के आसपास से काटें। कट साफ होना चाहिए और तने को कुचलना नहीं चाहिए। कटिंग तैयार करने के बाद उसे ज्यादा देर तक खुला न छोड़ें, क्योंकि तना सूखने लग सकता है। अगर एक ही शाखा से कई कटिंग तैयार कर रही हैं तो हर टुकड़े में कम से कम एक-दो स्वस्थ गांठ जरूर रखें।

कटिंग तैयार करने के बाद पत्तियां हटाएं
अब काटी गई शाखा के निचले हिस्से की पत्तियों को सावधानी से हटा दें। ऊपर की तरफ केवल 2 से 3 पत्तियां रहने दें। नीचे की पत्तियां मिट्टी के अंदर चली जाएंगी तो उनके सड़ने का खतरा हो सकता है। पत्तियां कम करने से कटिंग पानी की कमी से होने वाले तनाव को भी कुछ हद तक कम कर सकती है। बहुत बड़ी पत्तियां हों तो उन्हें थोड़ा छोटा किया जा सकता है, लेकिन ऊपर की स्वस्थ पत्तियों को पूरी तरह हटाने की जरूरत नहीं है।

फूल और कलियां भी हटा दें
अगर कटिंग वाली शाखा पर फूल या कलियां लगी हुई हैं तो उन्हें हटा देना बेहतर होता है। इसका कारण यह है कि कटिंग को शुरुआती समय में अपनी ऊर्जा नई जड़ें विकसित करने में लगानी होती है। फूल बनाए रखने में पौधे की ऊर्जा खर्च होती है। इसलिए कटिंग लगाते समय फूल या कलियां हटाने से पौधे की ऊर्जा जड़ और नई वृद्धि की ओर जा सकती है।
कटिंग को सूखने न दें
कटिंग तैयार करने के बाद उसे लंबे समय तक खुले में रखने से बचें। तने का कटा हुआ हिस्सा सूखने लगे तो जड़ बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए पहले से गमला और मिट्टी तैयार रखें और कटिंग काटने के तुरंत बाद उसे लगाने की कोशिश करें। अगर किसी कारण से तुरंत नहीं लगा पा रही हैं तो कटिंग को थोड़ी देर के लिए नमी वाली साफ जगह पर रखा जा सकता है, लेकिन उसे लंबे समय तक पानी में डुबोकर रखना जरूरी नहीं है।

अपराजिता की कटिंग किस मिट्टी में लगाएं?
कटिंग के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जो हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली हो। गमले में पानी जमा रहने से कटिंग के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। आप सामान्य गार्डन मिट्टी में कुछ मात्रा में कोकोपीट और रेत या कोई अन्य जल निकासी बढ़ाने वाला माध्यम मिला सकती हैं। उद्देश्य ऐसी मिट्टी तैयार करना है जिसमें नमी बनी रहे लेकिन अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। बहुत भारी और लगातार गीली मिट्टी कटिंग के लिए समस्या पैदा कर सकती है।
कटिंग को गमले में कैसे लगाएं?
सबसे पहले गमले में तैयार मिट्टी भरें और उसे हल्का नम कर लें। इसके बाद उंगली या किसी पतली लकड़ी की मदद से मिट्टी में छोटा छेद करें। कटिंग के निचले हिस्से की एक या दो गांठें मिट्टी के अंदर जाएं, इस तरह कटिंग को धीरे से लगाएं। इसके बाद आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबा दें ताकि कटिंग हिले नहीं। कटिंग को बहुत गहराई तक दबाने की जरूरत नहीं है। साथ ही ध्यान रखें कि ऊपर की पत्तियां मिट्टी के संपर्क में न आएं।

कटिंग लगाने के बाद कितना पानी दें?
कटिंग लगाने के तुरंत बाद मिट्टी को हल्का पानी दें। मिट्टी को पूरी तरह पानी से भर देने या गमले में पानी जमा होने देने से बचें। कटिंग के लिए नमी जरूरी है, लेकिन अत्यधिक पानी जड़ों के बनने से पहले ही तने को सड़ा सकता है। इसलिए जब मिट्टी की ऊपरी सतह हल्की सूखने लगे, तभी जरूरत के अनुसार पानी दें।
गमले को कहां रखें?
नई कटिंग को शुरुआती दिनों में ऐसी जगह रखें जहां उसे तेज सीधी धूप के बजाय उजली और अप्रत्यक्ष रोशनी मिले। बहुत तेज धूप में नई कटिंग जल्दी मुरझा सकती है। कटिंग में नई वृद्धि या जड़ें बनने के संकेत दिखने लगें तो धीरे-धीरे उसे ज्यादा रोशनी वाली जगह पर ले जाया जा सकता है। अपराजिता को आगे चलकर अच्छी धूप मिलने पर बेहतर वृद्धि और फूलों के लिए लाभ मिल सकता है।

क्या रूटिंग हार्मोन जरूरी है?
कटिंग से पौधा तैयार करने के लिए रूटिंग हार्मोन का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है। स्वस्थ कटिंग उचित नमी, तापमान और सही माध्यम मिलने पर अपने आप भी जड़ें विकसित कर सकती है। अगर आप रूटिंग हार्मोन इस्तेमाल करना चाहती हैं तो उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही प्रयोग करें। जरूरत से ज्यादा पाउडर या हार्मोन लगाने से फायदा बढ़ने की गारंटी नहीं होती।
कितने दिनों में नई जड़ें बन सकती हैं?
कटिंग से जड़ बनने में लगने वाला समय निश्चित नहीं होता। मौसम, तापमान, नमी, कटिंग की गुणवत्ता और पौधे की स्थिति के अनुसार इसमें कई सप्ताह लग सकते हैं। इस दौरान कटिंग को बार-बार मिट्टी से निकालकर जड़ें चेक करने की कोशिश न करें। ऐसा करने से बनने वाली नाजुक जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। नई पत्तियां या नई शाखा निकलना इस बात का संकेत हो सकता है कि कटिंग सक्रिय रूप से बढ़ रही है, हालांकि केवल नई पत्तियां निकलने से जड़ बनने की पुष्टि नहीं होती।

कब करें अपराजिता की कटिंग?
अपराजिता की कटिंग के लिए गर्म और सक्रिय वृद्धि वाला मौसम अक्सर बेहतर माना जाता है। बहुत अधिक ठंड या अत्यधिक गर्मी में कटिंग की सफलता प्रभावित हो सकती है। आपके क्षेत्र के मौसम के अनुसार समय चुनना बेहतर रहेगा। बरसात में नमी अधिक होने पर कटिंग के सड़ने का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए जल निकासी पर विशेष ध्यान दें।
एक शाखा से तैयार करें कई पौधे
अगर आपके पास एक लंबी और स्वस्थ अपराजिता की शाखा है तो उससे एक से अधिक कटिंग तैयार की जा सकती हैं। हर कटिंग में कम से कम एक-दो स्वस्थ नोड रखें और उन्हें अलग-अलग छोटे गमलों या ट्रे में लगाया जा सकता है। कुछ समय बाद जब कटिंग अच्छी तरह जड़ पकड़ ले तो उसे बड़े गमले में ट्रांसफर किया जा सकता है। इस तरह एक ही मदर प्लांट से कई नए अपराजिता के पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
नई बेल को सहारा देना न भूलें
अपराजिता एक बेल वाला पौधा है, इसलिए नई वृद्धि शुरू होने के बाद इसे चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत पड़ सकती है। गमले में छोटी जाली, लकड़ी या अन्य सुरक्षित सपोर्ट लगाया जा सकता है। जब बेल सहारे पर फैलने लगेगी तो पौधा बालकनी, खिड़की या गार्डन के किसी हिस्से को खूबसूरत बना सकता है। उचित रोशनी और देखभाल मिलने पर इसमें फूल भी आने लग सकते हैं।

कटिंग फेल होने से बचने के लिए इन गलतियों से बचें
कटिंग के लिए रोगग्रस्त या कमजोर शाखा न लें।
गंदी या कुंद कैंची से शाखा न काटें।
कटिंग में पत्तियों की संख्या बहुत ज्यादा न रखें।
कटिंग पर फूल और कलियां लगी हों तो उन्हें हटा दें।
गमले में पानी जमा न होने दें।
नई कटिंग को शुरुआत में तेज सीधी धूप में न रखें।
बार-बार कटिंग को मिट्टी से निकालकर जड़ें चेक न करें।
बहुत भारी मिट्टी का इस्तेमाल करने से बचें।
बालकनी को फूलों से सजाने का आसान तरीका
अगर आपकी बालकनी में सीमित जगह है तो कई छोटे गमलों में अपराजिता की कटिंग लगाकर उन्हें रेलिंग या दीवार के पास रखा जा सकता है। जैसे-जैसे बेल बढ़ेगी, उसे सुरक्षित सपोर्ट के सहारे ऊपर की ओर फैलाया जा सकता है। अलग-अलग रंगों की अपराजिता उपलब्ध होने पर इन्हें मिलाकर भी लगाया जा सकता है। इससे बालकनी में प्राकृतिक हरियाली के साथ रंग-बिरंगे फूलों का सुंदर नजारा बनाया जा सकता है।
यह जानकारी सामान्य बागवानी और पौधों की देखभाल से संबंधित है। कटिंग से पौधा तैयार होने की सफलता मौसम, पौधे की किस्म, कटिंग की गुणवत्ता, मिट्टी, नमी और देखभाल पर निर्भर करती है। हर कटिंग का सफल होना जरूरी नहीं है। पौधे में बीमारी या कीट का गंभीर संक्रमण दिखाई देने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।

